डोभाल के लौटने पर होगा बातचीत का फ़ैसला

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल. इमेज कॉपीरइट AFP

भारत और पाकिस्तान के विदेश सचिव स्तर की वार्ता पर भारत गुरुवार को फ़ैसला कर सकता है.

भारतीय अधिकारियों के मुताबिक़ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के पेरिस से लौटने के बाद सरकार पर इस पर फ़ैसला लेगी.

भारत को यह फ़ैसला लेना है कि पाकिस्तान के साथ विदेश सचिव स्तर की बातचीत तय समय पर होगी या नहीं.

दोनों देशों के विदेश सचिवों की बातचीत 15 जनवरी को प्रस्तावित है.

पठानकोट के वायुसेना अड्डे पर एक जनवरी को कुछ हथियारंबद लोगों ने हमला किया था. इस हमले के लिए भारत ने पाकिस्तान स्थित चरमपंथी संगठनों पर आरोप लगाया था.

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भारत ने कहा था कि विदेश सचिव स्तर की बातचीत से पहले ज़रूरी है कि पाकिस्तान 'तुरंत और निर्णायक' क़दम उठाए. भारत का कहना है कि हमले को लेकर उसने पाकिस्तान को कार्रवाई लायक ख़ुफ़िया सूचनाएं उपलब्ध करा दी हैं.

इस बीच बुधवार शाम पाकिस्तानी मीडिया ने ख़बर दी थी कि जैश-ए-मोहम्मद के मुखिया मसूद अज़हर को हिरासत में लिया गया है और जैश के कुछ दफ़्तरों पर छापेमारी की ख़बरें आई थीं.

इसके बाद से सबकी नज़रें इस बातचीत पर टिकी हैं.

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विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने बुधवार शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश सचिव एस जयशंकर से मिलकर इस विषय पर चर्चा की.

अगस्त 2015 में भारत-पाकिस्तान के सुरक्षा सलाहकारों की बातचीत प्रस्तावित थी लेकिन पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर के अलगावादी संगठन हुर्रियत कांफ्रेंस के नेताओं से मिलने की बात कही. फिर सुरक्षा सलाहकारों की बातचीत रद्द कर दी गई थी.

इसके बाद दोनों देशों में बातचीत का सिलसिला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिसंबर में पेरिस में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ से संक्षिप्त मुलाक़ात के बाद शुरू हुआ.

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भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नसीर ख़ान जंजुआ ने बैंकाक में पिछले साल छह दिसंबर को बैठक की.

इसमें शांति और सुरक्षा, चरमपंथ और जम्मू-कश्मीर समेत कई मुद्दों चर्चा हुई. बैठक में दोनों देशों ने रचनात्मक संपर्क आगे भी जारी रखने पर सहमत जताई.

इसके बाद पिछले साल 25 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबको चौंकाते हुए अफ़ग़ानिस्तान से लौटते हुए लाहौर पहुँचे. वहां उन्होंने प्रधानमंत्री नवाज शरीफ़ से मुलाक़ात की और उनके घर के विवाह कार्यक्रम में भाग लिया.

लेकिन पठानकोट के वायुसेना अड्डे पर एक जनवरी को हुए चरमपंथी हमलों के बाद वार्ता पर संकट के बादल फिर मंडराने लगे.

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