जो भरते हैं मिट्टी में कला के रंग

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सीरज सक्सेना युवा चित्रकार व सिरेमिक आर्टिस्ट हैं. मिट्टी को कला का रूप देने के अलावा सीरज और कई माध्यमों में भी काम करते हैं.

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Image caption अपने कला के अलावा सीरज कविता, साहित्य और लेखन में भी रूचि रखते हैं. अब तक वे कई यात्रा वृतांत लिख चुके हैं.

1974 में मध्यप्रदेश के निमाड़ क्षेत्र में जन्मे सीरज के परिवार में उनसे पहले कोई आर्टिस्ट नहीं हुआ.

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Image caption सीरज मानते हैं कि कलाकार को किसी एक माध्यम तक सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि कला के विस्तार को अपनाना चाहिए.

1996 में इंदौर के इंस्टीच्यूट ऑफ़ फ़ाइन आर्ट में डिग्री लेने के बाद वे भोपाल में भारत भवन चले गए.

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Image caption कुछ समय से सीरज अपनी कल्पना को मिट्टी या ब्रश के अलावा कपड़े और धागों के ज़रिये भी व्यक्त कर रहे हैं.

भारत भवन में उन्हें मिट्टी को कलाकृति में बदलने के गुर सीखने को मिले और इसमें हो सकने वाले विस्तार ने सीरज को नई संभावनाएं दीं.

भोपाल से अपनी कला संभावना की खोज सीरज को दिल्ली ले आई.

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Image caption सीरज कहते हैं कि मिट्टी के साथ काम करना एक तरह से पूर्णता की ओर बढ़ना है. आप अपनी कल्पनाशीलता से मिट्टी को कोई भी रूप दे सकते हैं.

दिल्ली के नज़दीक ख़ुरजा गाँव जो सिरेमिक पॉटरी के लिए प्रसिद्ध है, वहाँ सीरज अपने स्टूडियो में पिछले कई सालों से मिट्टी को कला का रूप दे रहे हैं.

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Image caption सीरज का मानना है कि कला को सजावट के तौर पर देखना सही नहीं है. कोई भी कला चाहे वह चित्रकला, शिल्पकला या मूर्तिकला कला हो- वो दर्शक से एक संवाद कायम करने की क्षमता रखती है.
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Image caption सीरज कहते हैं जीवन के हर रूप में कला है. आप अपने घर, आँगन, गाँव, खेत, शहर जहाँ कहीं भी देखें किसी न किसी रूप में कला को पायेंगे.
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Image caption भारतीय शास्त्रीय संगीत व नृत्य में भी आपकी खासी रूचि है. सीरज दिल्ली के साइक्लिस्ट ग्रुप का हिस्सा भी हैं और अब तक कई साइकिल रेसों में हिस्सा ले चुके हैं.

वे कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एकल और समूह प्रदर्शनियों में भाग ले चुके हैं.

साथ ही जापान, चीन, पोलैंड, ताइवान आदि कई देशों में सिरेमिक कार्यशालाओं व रेसीडेंसी का हिस्सा रह चुके हैं.

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Image caption दिल्ली से 90 किलोमीटर दूर खुरजा में सीरज अपने सिरेमिक स्टूडियो में मिट्टी को नया रूप देते हुए.

सीरज की कलाकृतियाँ भारत भवन भोपाल, नोएडा के एशियन अकादमी ऑफ़ फ़िल्म्स एंड टेलीविज़न, दिल्ली में गाँधी शांति प्रतिष्ठान में देखने को मिलती हैं.

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Image caption सीरज लगातार अलग-अलग रूपों में अपनी रचनात्मकता को नए आयाम दे रहे हैं.

इनकी कलाकृतियां जापान में क्यो इ गामा और थाईलैंड, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जर्मनी, स्पेन आदि देशों में प्राइवेट कलेक्शन का हिस्सा हैं.

सीरज दिल्ली में रहते हैं और कला में नई संभावनाएं तलाश कर रहे हैं.

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