छत्तीसगढ़ में सुरक्षाकर्मियों पर गैंग रेप के आरोप

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छत्तीसगढ़ के माओवाद प्रभावित बीजापुर ज़िले में कम से कम नौ आदिवासी महिलाओं ने सुरक्षा बल के जवानों पर सामूहिक दुष्कर्म के आरोप लगाए हैं.

पिछले एक सप्ताह में यह दूसरा मामला है, जिसमें सुरक्षा बल के जवानों पर इस तरह के गंभीर आरोप लगे हैं.

हालांकि बस्तर रेंज के आईजी पुलिस एसआरपी कल्लुरी का कहना है, “इस तरह की शिकायतें पुलिस के ख़िलाफ़ माओवादी समर्थकों के दुष्प्रचार का हिस्सा है.”

वहीं मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि पुलिस और सुरक्षा बल के जवान कई देशों में युद्ध की रणनीति के तौर पर यौन हिंसा और दुष्कर्म की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं.

मंगलवार को बीजापुर पहुंची आदिवासी महिलाओं का आरोप है कि 11 से 14 जनवरी के बीच बासागुड़ा थाना के अलग-अलग गांवों में सैकड़ों की संख्या में सुरक्षा बल के जवान पहुंचे और उन्होंने इन महिलाओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया.

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बासागुड़ा इलाक़े की इन महिलाओं ने कहा है कि सुरक्षा बल के जवानों ने कई महिलाओं के घरों में लूटपाट की और मारपीट भी की.

मामले की जानकारी सामने आने के बाद आम आदमी पार्टी की कार्यकर्ता सोनी सोरी कथित रूप से सामूहिक दुष्कर्म की शिकार महिलाओं के गांव पहुंचीं और उन्हें बीजापुर ज़िला मुख्यालय लेकर पहुँचीं.

आम आदमी पार्टी के प्रदेश संयोजक डॉक्टर संकेत ठाकुर कहते हैं, “देर रात कर एसडीएम के यहां सामूहिक दुष्कर्म की शिकार नौ पीड़ित महिलाओं के बयान दर्ज कराए गए हैं. हम इस पूरे मामले की हाई कोर्ट के किसी सेवानिवृत जज से जांच चाहते हैं.”

दूसरी ओर मानवाधिकार संगठन पीयूसीएल की छत्तीसगढ़ इकाई के प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर लाखन सिंह भी मानते हैं कि जिन जवानों पर आरोप है, उन्हीं की सहयोगी ज़िला पुलिस मामले की स्वतंत्र जांच नहीं कर सकती.

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डॉक्टर सिंह ने कहा, “यह किसी युद्ध की रणनीति की तरह का मामला है और आदिवासियों के आत्मसम्मान को ख़त्म करने की कोशिश का हिस्सा है. पुलिस अपनी यौन हिंसा की इस रणनीति से आदिवासियों के प्रतिरोध को दबाना चाहती है.”

माओवाद प्रभावित बस्तर में सुरक्षाबलों के ख़िलाफ़ महिलाओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म के आरोप लगातार सामने आते रहे हैं.

तीन दिन पहले भी सुकमा ज़िले के कुन्ना पेद्दापारा गांव की आदिवासी महिलाओं ने आरोप लगाया था कि गांव में बड़ी संख्या में सुरक्षा बल और आत्मसमर्पण कर चुके माओवादियों का दल पहुंचा और महिलाओं को प्रताड़ित किया.

कथित रूप से पीड़ित महिलाओं ने अपनी शिकायत में कहा था कि एक महिला के पति और बच्चे को जब सुरक्षा बल के जवान अपने साथ गादिरास स्थित पुलिस कैंप में ले गए तो पीड़िता ने पुलिस से निवेदन किया कि उनका दुधमुंहा बच्चा है, पति और बच्चे को न ले जाएं.

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आरोप है कि सुरक्षा बल के जवानों ने स्तन से दूध निकाल कर दिखाने को कहा और बाद में एक सिपाही ने कथित रूप से आदिवासी महिला के स्तन से दूध निचोड़ कर देखा.

पीड़ितों ने कई महिलाओं को निर्वस्त्र करने और उनके साथ यौन दुर्व्यवहार किए जाने के आरोप भी लगाए थे.

पिछले साल नवंबर में भी आदिवासी महिलाओं ने आरोप लगाए थे कि बड़ागुड़ा थाना के चिन्नागेलूर, पेदागेलूर, गोदेम और भूर्गीचेरु समेत कई गांवों में सीआरपीएफ और पुलिस के कुछ जवानों ने माओवादियों की तलाशी के नाम पर उनके घरों में घुसकर लूटपाट की.

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इन आदिवासी महिलाओं का आरोप था कि सुरक्षा बल जवानों ने उनके घरों से पुरुष सदस्यों को बलपूर्वक निकाला और महिलाओं के साथ बलात्कार किया. कई महिलाओं के साथ मारपीट भी की गई. कथित रूप से प्रताड़ित महिलाओं की संख्या 40 से अधिक थी.

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