'मोदी की आंख पांच दिन बाद खुली'

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हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स यूनियन की ज्वांइट एक्शन कमेटी ने दलित छात्रों तक पहुँचने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोशिश को नामंज़ूर कर दिया है.

प्रधानमंत्री मोदी ने लखनऊ में एक कार्यक्रम के दौरान दलित छात्र रोहित वेमुला का ज़िक्र करते हुए उनकी मां के प्रति सहानुभूति जताई थी.

ज्वांइट एक्शन कमेटी ने रोहित की ख़ुदकुशी और पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए न्यायिक आयोग के गठन को भी नामंज़ूर कर दिया है.

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आंदोलनकारी छात्रों ने तय किया है कि वे वाइस चांसलर अप्पा राव, केंद्रीय मंत्री बंडारू दत्तात्रेय और इस मामले से जुड़े अन्य लोगों की बर्ख़ास्तगी तक अपना आंदोलन जारी रखेंगे.

ज्वांइट एक्शन कमेटी इन सभी को एससी-एसटी अत्याचार रोकथाम क़ानून के तहत केस दर्ज करने की भी मांग कर रही है.

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Image caption रोहित की ख़ुदकुशी के बाद हैदराबाद, दिल्ली और कुछ अन्य शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए

ज्वांइट एक्शन कमेटी के सदस्य प्रशांत बडगे ने बीबीसी हिंदी को बताया, ''ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री मोदी की आंख दलित छात्र की मौत के पांच दिन बाद खुली है.''

ज्वाइंट एक्शन कमेटी के एक अन्य सदस्य छात्र डोंथा प्रशांत ने कहा, ''न्यायिक आयोग की नियुक्ति से मुद्दा भटक जाएगा. मुंबई दंगों पर श्रीकृष्ण कमेटी की रिपोर्ट पर कौन सी कार्रवाई हुई थी.''

इससे पहले लखनऊ में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रोहित वेमुला की ख़ुदकुशी का ज़िक्र किया था.

उन्होंने अपने भाषण में कहा था, ''राजनीति एक तरफ़ है, एक मां ने एक लाल खोया. इसकी पीड़ा मैं भलीभांति महसूस करता हूँ.''

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