राष्ट्रपति शासन लगाने पर मुख्यमंत्री नाराज़

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अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने के केंद्र के निर्णय ने एक बार फिर से केंद्र-राज्य संबंधों पर बहस छेड़ दी है.

अरुणाचल विधानसभा के चुनावों में कांग्रेस को 60 में से 42 सीटें मिलीं. एक क्षेत्रीय पार्टी के विलय के बाद पांच विधायक मिलाकर कांग्रेस के विधायकों की संख्या 47 हो गई.

मौजूदा संकट तब शुरू हुआ जब कांग्रेस के 21 विधायकों ने बग़ावत कर दी, जिसके बाद नाबाम टुकी की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार अल्पमत में आ गई.

इन लोगों ने भाजपा के 11 विधायकों के साथ मिल कर नाबाम टुकी सरकार को हटाने का प्रयास किया. बाद में, कांग्रेस के 14 विधायकों को अयोग्य करार दे दिया गया.

बीबीसी संवाददाता निखिल रंजन ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री नाबाम टुकी से बात की.

टुकी ने कहा, "मेरे साथ कांग्रेस के 45 में 26 विधायक हैं. लेकिन यह तो पार्टी के भीतर का मामला है. इसमें राज्यपाल व केंद्र सरकार को हस्तक्षेप का कोई अधिकार नहीं हैं."

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"भाजपा के भीतर कई राज्यों में असंतोष है. इसका मतलब यह तो नहीं कि सरकार को गिरा दिया जाए. लोकतंत्र को कमज़ोर किया जाए."

वे कहते हैं, "भाजपा के पास तो सिर्फ 11 विधायक हैं, उसके पास बहुमत नहीं है. सरकार तो पार्टी को बनानी है. मेरी पार्टी के पास बहुमत है."

टुकी मोदी सरकार के इस फैसले की आलोचना करते समय संविधान की दसवीं अनुसूची का उदाहरण देते हैं. वह कहते हैं कि संविधान में दसवीं अनुसूची को जगह इसलिए दी गई कि मज़बूत सरकार बने. मज़बूत सरकार चलाने के लिए ही इसमें संशोधन भी किया गया था.

52वें संविधान संशोधन (1985) से संविधान में एक नई, दसवीं अनुसूची जोड़कर विधायकों को मुख्यमंत्री चुनने, किसी विधेयक पर मतदान करने के लिए भी दलीय निर्देश से चलने को बाध्य कर दिया गया है.

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टुकी कहते हैं, "राज्यपाल साहब ने ही इन खास परिस्थितियों का निर्माण किया है. आज के हालात में एक तरफ राज्य व जनता है और दूसरी तरफ राज्यपाल हैं. केंद्र सरकार ने राज्यपाल की बात सुनकर एकतरफा फैसला लिया है. राज्य में ऐसी कोई आपातकालीन कानून-व्यवस्था की समस्या या प्राकृतिक आपदा नहीं आई थी कि राष्ट्रपति शासन लगाया जाए."

"कुछ ग़ैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) ने राज्यपाल के ख़िलाफ़ धरना दिया था. वो एक लोकतांत्रिक आंदोलन था. राज्य सरकार ने राज्यपाल के खिलाफ धरना नहीं दिया था. बड़े-बड़े प्रदेशों में ऐसी कई घटनाएं घट चुकी हैं जब राष्ट्रपति शासन लगाया जाना चाहिए था, लेकिन वहां ऐसा नहीं किया गया."

अरुणाचल के मुख्यमंत्री ने कहा, "गुजरात में दंगों के बाद भी वहां पर राष्ट्रपति शासन नहीं लगाया गया. अरुणाचल में एक मच्छर भी नहीं मरा फिर भी हमें परेशान किया जा रहा है. हम राष्ट्रपति के सामने और सुप्रीम कोर्ट में विरोध दर्ज करेंगे. प्रदेश की जनता इस फैसले से खासी निराश हुई है."

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