फिर जाएंगे शनि शिगणापुर: तृप्ति

भूमता ब्रिगेड की समर्थकों के साथ तृप्ति देसाई. इमेज कॉपीरइट PTI

महाराष्ट्र के अहमदनगर ज़िले के मशहूर शनि शिगणापुर मंदिर में परंपरा के उलट पूजा करने जा रही भूमाता ब्रिगेड की महिलाओं को मंगलवार को मंदिर से क़रीब 70 किलोमीटर दूर सूपा नाम की जगह पर पुलिस ने रोककर हिरासत में ले लिया था. बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया.

पुलिस की इस कार्रवाई के बाद इस संगठन की महिलाओं ने कहा कि वे अपने अभियान से पीछे नहीं हटेंगी.

शिगणापुर में शनि शिला एक चबूतरे पर बनी हुई है. इस चबूतरे पर महिलाओं को जाने की इजाज़त नहीं है.

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भूमाता ब्रिगेड की प्रमुख तृप्ति देसाई और दूसरी महिलाओं को पुलिस ने हिरासत में लिया और वहां धारा 144 लगा दी.

तृप्ति देसाई ने बीबीसी संवाददाता सुशीला सिंह से बातचीत में कहा कि इस बार वह चूक गईं लेकिन अपनी कोशिशें आगे भी जारी रखेंगी.

वह कहती हैं, "पुलिस ने हमारे संगठन की 400-500 महिलाओं को रास्ते में रोका था. उस वक़्त हम दर्शन के लिए जा रहे थे. पुलिस ने तो शनि शिगणापुर से 70 किलोमीटर पहले ही हमें पकड़ लिया. हम उनसे विनती कर रहे थे कि हमें दर्शन के लिए छोड़ दो.''

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देसाई कहती हैं कि यह संविधान का अपमान है क्योंकि ''26 जनवरी को स्त्री-पुरुष समानता का अधिकार मिला था. उसी दिन पुलिस ने समानता के ख़िलाफ़ कार्रवाई की. हमने इसीलिए इस दिन को महिलाओं के लिए काला दिन घोषित कर दिया.''

अगले क़दम के सवाल पर वह कहती हैं कि उनका संगठन हर बार चार-चार महिलाएं दर्शन के लिए भेजेगा. अगली बार वे बिना कोई सूचना दिए ही वहां पहुँच सकती हैं.

देसाई कहती हैं, "मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से हम यह मांग करते हैं कि वो शनि शिगणापुर ट्रस्ट सरकार के तहत लाएं और मंदिर को महिला-पुरुषों के लिए समान रूप से खोला जाए."

वह कहती हैं कि जिस-जिस राज्य के मंदिरों में इस तरह महिला और पुरुषों में भेदभाव होता है. वहां भूमाता ब्रिगेड महिलाओं के अधिकार के लिए लड़ेगा और पुलिस की कार्रवाई से बिल्कुल नहीं डरेगा.

(बीबीसी संवाददाता सुशीला सिंह से हुई बातचीत पर आधारित)(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

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