प्रत्याशी हैं नहीं, ख़ाली हैं 1554 पंचायत पद

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झारखंड में दिसंबर में हुए पंचायत चुनाव में 1554 सीटों के लिए प्रत्याशी ही नहीं मिले.

इन सीटों के लिए किसी ने नामांकन ही नहीं भरा. राज्य निर्वाचन आयोग अब इन जगहों पर चुनाव की प्रक्रिया दोबारा शुरू करेगा.

झारखंड मुक्ति मोर्चा के स्थानीय नेता अब्दुल क़ादिर ने बीबीसी को बताया कि परिसीमन में खामियों के कारण यह स्थिति पैदा हुई है.

इनमें से अधिकतर सीटें आरक्षित श्रेणी की हैं. राज्य निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक सबसे ज़्यादा 295 सीटें पूर्वी सिंहभूम ज़िले में खाली रह गईं.

वहीं कोडरमा एकमात्र ज़िला है, जहां कोई भी सीट खाली नहीं रही.

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सरायकेला खरसावां में 200, गिरिडीह में 113 और रांची ज़िले में 132 सीटों पर किसी प्रत्याशी ने नामांकन दाखिल नहीं किया.

खाली रह गई सीटों में सबसे ज़्यादा 1523 सीटें वार्ड सदस्यों की हैं. मुखिया की 13 और पंचायत समिति सदस्यों की 18 सीटें भी खाली रह गई हैं.

मुखिया की सबसे ज़्यादा 10 रिक्त सीटें साहिबगंज ज़िले में हैं.

अब्दुल क़ादिर ने बताया कि साहिबगंज ज़िले की दरियापुर, महाराजपुर, त्रिकुंड जैसी पंचायतों में मुखिया का पद अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है, जबकि इन जगहों पर आदिवासी हैं ही नहीं.

क़ादिर कहते हैं कि अगर इसमें सुधार नहीं किया गया तो ये सीटें हर बार ख़ाली रह जाएंगी.

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Image caption शिव बसंत, राज्य निर्वाचन आयुक्त

राज्य निर्वाचन आयुक्त शिव बसंत ने बीबीसी को बताया कि राज्य में 4118 पंचायतों के लिए चुनाव कराए गए और 73 प्रतिशत मतदान हुआ.

उन्होंने बताया, ''इन जगहों के लिए दोबारा चुनाव प्रक्रिया शुरू होगी. संभव है कि सितंबर-अक्तूबर में इन रिक्त सीटों के लिए उपचुनाव कराए जाएं. इसके लिए सभी ज़िलों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है. अगर कहीं ख़ामी मिली तो उसे दूर किया जाएगा.''

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