'समाधि' के दो साल बाद, गुरु के लौटने की आस

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विश्वानंद 28 जनवरी से ही ध्यान की अवस्था में हैं और अपने गुरु आशुतोष महाराज से वापस आने की प्रार्थना कर रहे हैं.

पंजाब में जालंधर के पास नूरमहल में आशुतोष महाराज के शिष्यों ने उनका शरीर 28 जनवरी 2014 से फ़्रीज़ करके रखा हुआ है.

नूरमहल के आश्रम में माहौल अजीब सा है. एक ओर विश्वानंद का दावा है कि सपने में उनके गुरु आशुतोष महाराज ने बताया कि उनके वापस आने का समय हो गया है.

दूसरी ओर अन्य शिष्य ध्यान लगाकर, सपने में गुरु से सलाह पाने और समस्याओं को हल कर लेने का दावा करते हैं.

विश्वानंद आशुतोष महाराज के उन 36 शिष्यों में से एक हैं, जो बारी बारी से दो साल से फ़ीज़ में रखे आशुतोष महाराज के शरीर के दर्शन करते हैं.

उनके बाक़ी शिष्यों को ऐसे दर्शन की ज़रूरत महसूस नहीं होती है. उनका कहना है कि 'ध्यान' के दौरान ही उनके गुरु उन्हें दर्शन दे देते हैं.

इसकी वजह से आध्यात्मिक गुरु की समाधि लेने की दूसरे वर्षगांठ के मौक़े पर नूरमहल आश्रम में कोई बड़ी भीड़ भी देखने को नहीं मिलती है.

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विश्वानंद ने बीबीसी को बताया, "गुरुजी के शरीर के पास दो लोग हमेशा मौजूद होते हैं, इनमें से एक ध्यान लगा रहा होता है जबकि दूसरा उस समय की प्रतीक्षा में होता है जब गुरुजी को लगे कि उनके शरीर में वापस लौटने की घड़ी आ गई है, ताकि गुरुजी का स्वागत किया जा सके."

विश्वानंद का कहना है कि गुरुजी की सेवा में 36 लोग लगे हुए थे और आज भी इस कार्य में वही 36 लोग लगे हुए हैं.

उनके मुताबिक़ जिस कमरे में गुरुजी का शरीर रखा हुआ है वहां आने वाला हर व्यक्ति सफ़ाई और स्वच्छता को लेकर ख़ास सावधानी रखता है ताकि वह शरीर किसी भी तरह से अपवित्र न हो.

उनका कहना है, "समाधि से पहले भी गुरुजी से मिलने के दौरान हम साफ-सफ़ाई को लेकर ख़ास ध्यान रखते थे. समाधि मृत्यु के समान ही एक अवस्था होती है, जिसमें शरीर मृत्यु के बाद की अवस्था में चला जाता है."

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विश्वानंद का दावा है कि आश्रम में एक मिनट के लिए भी बिजली नहीं जाती है ताकि गुरुजी के शरीर उसी स्थिति में रहे 'जब वो ध्यान की अवस्था में' गए थे.

दूसरी तरफ जिस गुरु के चार करोड़ से भी ज़्यादा शिष्य होने का दावा किया जाता हो, उनकी समाधि की दूसरे वर्षगांठ पर महज़ कुछ सौ लोगों को देखकर किसी को भी हैरानी हो सकती है.

दावा ये भी किया जाता है कि 2102 में गुरुजी के अंतिम प्रवचन को सुनने के लिए यहां 38 लाख लोग जमा हो गए थे.

इनमें से हर किसी का कहना है कि गुरुजी ने उन्हें ध्यान के दौरान दर्शन दिया है और कहा कि वो वापस आएंगे, लेकिन कब यह नहीं पता.

इससे तो ऐसा लगता है कि वो लोग इस शरीर को अनंत काल तक सुरक्षित रखने को तैयार हैं. उनके शिष्यों का दावा है कि कई कहानियों में हिमालय के ऋषियों का शरीर सैंकड़ों साल तक उसी स्थिति में मौजूद रहा था.

पंजाब के अतिरिक्त एड्वोकेट जनरल रीता कोहली का कहना है कि ऐसा लगता है कि पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय भी दख़ल देने के बजाय, आस्था के इस मसले का न्यायायल के बाहर ही हल चाहता है.

उनका कहना है, "यह एक आस्था का मसला है, गुरुजी के स्थानीय दावेदार और तथाकथित बेटे दिलीप झा को उत्तराधिकारी की तौर पर मान्यता नहीं दी गई है क्योंकि वो कोर्ट में अपने को गुरुजी का बेटा साबित नहीं कर सके."

रीता कोहली का कहना है, "हमारे पास ऐसे कई उदाहरण हैं जिनमें शरीर को सदियों तक ममी के तौर पर रखा गया है या फिर बौद्ध संतों और चर्चों की आस्था के अनुसार भी ऐसा किया गया."

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आशुतोष का यह आश्रम 260 एकड़ में फैला हुआ है जिसके एक भाग में प्रवचन के लिए हॉल है, जो अब वीरान नज़र आता है. यहां शाम की आरती में महज़ कुछ सौ भक्त ही जमा होते हैं.

विश्वानंद का दावा है, "दिव्य ज्योति जागरण संस्थान अपने शिष्यों को ईश्वर की अनुभूति की तकनीक सीखाकर उन्हें शक्ति दे रहा है. इससे भक्त लोग ध्यान के दौरान रोशनी, ध्वनि और जिह्वा पर अमृत के रूप में ईश्वर का अनुभव करते हैं. उनका कहना है कि अलग-अलग आस्था की धार्मिक पुस्तकों और वेदों में भी ऐसी व्याख्या है."

विश्वानंद का कहना है कि 'ऐसा नहीं है कि हम गुरुजी की गैरमौजूदगी का अनुभव नहीं करते हैं, कभी-कभी आशीर्वाद के रूप में मैं उनके स्पर्श को याद करता हूं.'

दिव्य ज्योति जागरण संस्थान के गाय प्रजनन केन्द्र की देखभाल करने वाले स्वामी चिन्मयानंद का कहना है कि 'गुरुजी के मौजूद नहीं होने से गायें भी उदास दिखती हैं.'

दिव्य ज्योति जागरण संस्थान में गौ प्रजनन केन्द्र देश के ऐसे अहम केंद्रों में से एक है. यहां पर गाय की सहिवाल नस्ल की सबसे बड़ी तादात मौजूद है. ज़्यादा दूध देने वाली गाय की यह नस्ल ख़त्म होने के कगार पर है.

इस आश्रम में 200 से ज़्यादा सहिवाल गाये हैं जिनकी संख्या देश में बहुत कम है. हालाँकि पाकिस्तान में ये गाय पाई जाती है.

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इस केन्द्र में गाय की चार दुर्लभ प्रजातियां गिर, सहिवाल, कनक्रेज और थारपारकर मौजूद हैं. इनके दूध की उच्च गुणवत्ता मानी जाती है और इसे ए2 दूध कहा जाता है.

स्वामी चिन्मयानंद का कहना है कि जब भी गायों को लेकर वो किसी परेशानी में होते हैं तो वो 'ध्यान' करते हैं और फिर गुरुजी उन्हें बताते हैं कि इसके लिए क्या करना है.

कुछ इसी तरह का अनुभव लखविंदर सिंह का भी है जो जैविक खेती की निगरानी करते हैं.

वो बताते हैं, "मेरा कीटों की समस्या से सामना हुआ तो मैंने ध्यान की मुद्रा में गुरुजी से पूछा, फिर उन्होंने जवाब दिया कि इसे क़ुदरती ताक़तों पर छोड़ दो. पौधों को खाने वाले कीड़ों को परभक्षी खा जाते हैं. मुझे उत्तर मिल गया और फ़सल बच गई."

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