'जो देते हैं पेड़ों को नई ज़िंदगी'

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मुंबई में महिलाओं के एक समूह ने सूखे बेजान पेड़ों को रंगों और कूची की मदद से सजीव बनाने का बीड़ा उठाया है.

सड़क किनारे अधकटे सूखे पेड़ों को देखना दुखद लगता है, लेकिन इस दुखद नज़ारे को सुखद अनुभूति में बदलने के प्रयास में कुछ लोग जुटे हैं और यह बदलाव वे कला के ज़रिए ला रहे हैं.

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रंगों और कूची की मदद से इन पेड़ों को सुंदर कलाकृति में बदलने के प्रयास में जुटा यह समूह खुद को 'रास्ता छाप' कहता है.

14 सदस्यों के समूह में कोई टीचर है, तो कोई एयरहोस्टेस, कोई डिज़ाइनर है तो कोई बिजनेस वूमेन. आत्मनिर्भर महिलाओं के इस समूह ने बेजान पेड़ों को सुंदर कलाकृति बनाने के इस काम में और भी कई लोगों को जोड़ा है.

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इस समूह से हाल ही में बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार और उनकी पत्नी भी जुड़ी हैं. वैसे इनके समूह में तक़रीबन 40 स्वयंसेवक हैं, जो समय-समय पर पेड़ों पर चित्रकारी करने का काम करते हैं.

सड़क किनारे लगे पेड़ों पर ध्यान न देने या किसी प्रकार के संक्रमण की वजह से ये सूख जाते हैं.

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कई बार कुछ मुनाफ़ाखोर बिल्डर अपने फ़ायदे के लिए इन पेड़ों को ज़हरीला इंजेक्शन लगाकर इन्हें मार देते हैं. सूखे पेड़ों के निचले तने को छोड़ बाकी हिस्सा काट दिया जाता है. ये सूखे ठूंठ दिखने में ख़राब लगते हैं.

'रास्ता छाप' की संस्थापक प्रिया भिमानी ने इन्हीं पेड़ों को बचाने के लिए यह समूह शुरू किया.

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पेशे से कंसल्टेंट प्रिया कहती हैं, ''पिछले साल हम सभी दोस्त बांद्रा गए. वहां हमने दीवारों पर खूबसूरत स्ट्रीट आर्ट देखी. उसे देखने के बाद लगा कि हम भी कुछ ऐसा कर सकते हैं.''

वह आगे बताती हैं, ''जब हमने जुहू को अच्छी तरह से देखा तो पाया कि कई पेड़ बेजान हो गए हैं और उन्हें काट दिया गया है. तब हमने सोचा क्यों न इन्ही पेड़ों पर चित्रकारी की जाए.''

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इसके बाद इस समूह ने स्थानीय नगर निगम से इजाज़त लेकर पेड़ों पर चित्रकारी करने का काम शुरू किया.

इस काम में आने वाले ख़र्च के बारे में समूह की सदस्या सबिषी शंकर कहती हैं, ''एक पेड़ को सुंदर बनाने में तक़रीबन पांच हज़ार तक का ख़र्च आता है. शुरू में यह ख़र्च हम सबने अपनी जेब से दिया."

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वे आगे कहती हैं, "लेकिन अब फ़ेसबुक, ट्विटर और दूसरी सोशल नेटवर्किंग साइट से लोग हमसे जुड़कर हमारी मदद कर रहे हैं.''

इस समूह की एक और सदस्या नीलू कहती हैं, ''हम पेड़ों पर चित्रकारी करके इनकी तरफ लोगों का ध्यान आकर्षित करते हैं.''

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वे इस चित्रकारी के माध्यम से 'बेटी बचाओ', 'पानी बचाओ' जैसे कई सामाजिक मुद्दों को भी उठाने का प्रयास करते हैं.

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