'क्या गुजरात भारत का हिस्सा नहीं?'

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सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम को लागू करने में कोताही बरतने पर गुजरात समेत कई राज्यों को कड़ी फटकार लगाई है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने पूछा है कि जिस क़ानून को देश की संसद ने बनाया है, उसे लागू क्यों नहीं किया जा रहा है.

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जस्टिस मदान बी लोकुर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा, “संसद क्या कर रही है? क्या गुजरात भारत का हिस्सा नहीं है? क़ानून कहता है कि ये पूरे देश मे लागू होगा और गुजरात इसे लागू नहीं कर रहा है. कल कोई कह सकता है कि वो सीआरपीसी, आईपीसी जैसे क़ानूनों को लागू नहीं करेगा.”

खंडपीठ ने केंद्र सरकार को सूखा प्रभावित राज्यों में मनरेगा और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा जैसी कल्याण योजनाओं की वस्तुस्थिति के आंकड़े जुटाने के भी निर्देश दिए.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस मामले में 10 फ़रवरी तक हलफ़नामा दायर करने का आदेश भी दिया. मामले की अगली सुनवाई 12 फ़रवरी को होगी.

सुप्रीम कोर्ट ने 18 जनवरी को सरकार से इन कल्याण योजनाओं के बारे में केंद्र से सूचनाएं देने को कहा था ताकि पता लगाया जा सके कि सूखा प्रभावित इलाक़ों में न्यूनतम रोजगार और भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है या नहीं.

खंडपीठ एक जनहित याचिका की सुनवाई कर रही है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, गुजरात, ओडिशा, झारखंड, बिहार, हरियाणा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में कई इलाक़े सूखे की चपेट में हैं और प्रशासन उन्हें पर्याप्त राहत मुहैया नहीं करा रहा है.

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