ढाई लाख आवारा कुत्ते और 'परेशान' केरलवासी

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जब अंबिली अपनी दोस्त रामचंद्रन नायर के घर गईं तो नायर का पालतू कुत्ता भौंकने लगा, अंबिली ने मदद के लिए पुकारने पर कहा कि "भौंकने वाले कुत्ते काटते नहीं."

लेकिन केरल के क़रीब ढाई लाख आवारा कुत्ते भौंक भी रहे और लोगों को काट भी रहे हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ 2014-2015 में एक लाख से भी अधिक लोगों को आवारा कुत्तों ने काटा.

अंबिली के तीन साल के बेटे देवनंदन को भी एक अावारा कुत्ते ने काट लिया था जिससे उसकी आंखें घायल हो गईं.

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Image caption केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी पशूओं के अधिकारों के लिए आवाज़ उठाती रही हैं.

अंबिली "इस बात से सहमत हैं कि जानवरों को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए" लेकिन वो इस तरह के हादसों को बर्दाश्त करने के पक्ष में नहीं हैं.

अंबलि कुत्तों के उन्मूलन से जुड़ी हैं और चाहती हैं कि "समस्या से निपटने के लिए राज्य और केंद्र सरकार को मिलकर काम करना चाहिए."

एक सुझाव है कि अावारा कुत्तों को पड़ोसी राज्यों में भेज दिया जाए, जहां कई लोग उन्हें गोद लेने को तैयार हैं. प्रशासन ने अवारा कुत्तों को पकड़ने वाले विशेषज्ञ भी बुलाए थे.

दूसरी तरफ़ आवारा कुत्तों से परेशान लोगों में से कुछ ने इनपर हमला भी कर दिया.

मुवातपुहा नगर पालिका के ख़िलाफ़ आवारा कुत्तों को मारने के शिकायत आने पर केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने उससे जवाब-तलब किया.

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Image caption रैबीज़ कुत्तों में बहुत बड़ी समस्या है जिसे लेकर काफ़ी लोग डरते हैं.

मेनका गांधी ने बीबीसी हिंदी को बताया, "ख़तरा शब्द तो जानवरों का उपनाम हो गया है. अगर कोई कुत्ता भौंक रहा है या फिर उग्र व्यवहार कर रहा है तो केवल इस आधार पर उसे पागल नहीं घोषित किया जा सकता."

वो कहती हैं, "इस मुद्दे से निपटने के लिए उनकी नसबंदी समेत और भी कई विकल्प मौजूद हैं. हम दया मृत्यु का कभी भी समर्थन नहीं करेंगे."

पशु अधिकार के हामी लोगों ने भी कुत्तों पर हमलों को लेकर हो हल्ला मचाया. दया मृत्यु के सुझाव पर भी सोशल मीडिया पर काफी हंगामा हुआ.

वहीं भारतीय पशु संरक्षण संगठनों के महासंघ ने भी आवारा कुत्तों को मारने के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अपील की है.

बॉयकॉट केरल अभियान से जुड़ी और पशु कल्याण कार्यकर्ता अखिला वी का कहना है कि जानवरों के साथ क्रूर व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए.

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वो कहती हैं, "यह पूरी तरह घृणित और बर्बर है. इंसान के सबसे अच्छे दोस्त माने जाने वाले जानवर को इतनी बेरहमी से कैसे मारा जा सकता है."

वो कहती हैं, "पिछले 65 सालों में उन पर लगातार ज़ुल्म किए गए. उन्हें प्रताड़ित किया गया. इस वजह से वो इंसानों के शक़ की निगाह से देखने लगे हैं और उग्र व्यवहार कर रहे हैं."

राज्य का पशुपालन विभाग 50 ऐसे केंद्र खोलने जा रहा है जिसमें पर्याप्त संख्या में जानवरों के डॉक्टर मौजूद रहेंगे.

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