बेंगलुरु घटना रोड रेज या नस्लवाद नहीं: तंज़ानिया

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भारत में तंज़ानिया के उच्चायुक्त जॉन डब्ल्यू एच किजाज़ी ने बेंगलुरु में तंज़ानियाई छात्रा के साथ बदसुलूकी की घटना को रोड रेज या नस्लवाद की घटना मानने से इनकार किया है.

उन्होंने इस घटना के बाद कर्नाटक सरकार के ठोस क़दमों के प्रति संतोष जताया है.

किजाज़ी भारतीय विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के साथ शुक्रवार शाम बेंगलुरु पहुँचे थे. इसके बाद वो सीधे राज्य सचिवालय गए और राज्य के गृहमंत्री जी परमेश्वर और शीर्ष पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की.

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आरोप हैं कि रविवार शाम को नशे में गाड़ी चलाते एक सूडानी छात्र ने सड़क किनारे सो रही एक स्थानीय महिला को कुचल दिया था. इसके बाद भीड़ ने घटनास्थल से गुज़रे तंज़ानियाई छात्रों पर अपना ग़ुस्सा निकाला था और कथित रूप से एक छात्रा के कपड़े फाड़ दिए थे.

बैठक के बाद किजाज़ी ने संवाददाताओं से कहा, "हम नस्लवाद के मुद्दे पर बात नहीं करना चाहते क्योंकि मेरा मानना है कि मीडिया अभी इसी में सबसे ज़्यादा दिलचस्पी ले रहा है. हमने तथ्यों पर चर्चा की और उठाए गए ठोस क़दमों पर बात की."

उन्होंने कहा, "अधिक अहम यह है कि हम भविष्य की तरफ देख रहे हैं और हम ऐसा नहीं करेंगे तो मिट जाएंगे. हमें मौजूदा समस्या सुलझानी होगी पर हमें लंबी अवधि के क़दमों की तरफ भी देखना होगा."

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किजाज़ी ने कहा कि सरकार ने ठोस क़दम उठाए हैं और कुछ अधिकारियों को निलंबित भी किया है.

यह पूछे जाने पर कि उनका अपने देश और दूसरे अफ्रीकी देशों के छात्रों को क्या संदेश है? किजाज़ी ने कहा, "मेरा संदेश एकदम साफ़ है. देश के क़ानून का पालन करो, सौहार्द्र से रहो, स्थानीय नेतृत्व और स्थानीय समुदायों का सम्मान करो. यह दोतरफ़ा होता है."

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भारतीय विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव पार्थो सतपति ने कहा, "हम देश में मौजूद अफ्रीकी समुदाय को बताना चाहते हैं कि हमें उनकी सुरक्षा की चिंता है. किसी तरह का कोई संघर्ष नहीं है और हम मिलकर काम कर रहे हैं."

इस बीच, बेंगलुरु पुलिस ने इस मामले में कुल नौ लोगों को गिरफ़्तार किया है. सोल्देवेनहल्ली पुलिस थाना प्रभारी को निलंबित किया गया है.

साथ ही तंज़ानियाई छात्रों को निशाना बना रही भीड़ के ख़िलाफ़ कार्रवाई का प्रयास न करने के लिए एक और कांस्टेबल को भी निलंबित किया गया है.

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