'मुंहतोड़ जवाब' और 'देख लेने की धमकियां'

उत्तर प्रदेश में उपचुनाव

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विधानसभा की दो सीटों पर हो रहे उपचुनाव के प्रचार का मूड किसी उन्माद से कम नहीं है.

मोटरसाइकलों पर युवकों का शोर मचाता हुआ हुजूम, एक दूसरे को 'मुंहतोड़ जवाब' देने के नारे और 'देख लेने की धमकियां', बस यही है इन दोनों सीटों पर हो रहे चुनावी प्रचार का तेवर. मगर कार्यकर्ता कहते हैं कि यह तो महज़ प्रचार का एक तरीका है.

यह दो सीटें हैं मुज़फ्फरनगर शहर और इससे सटा देवबंद इलाक़ा.

कहा जा रहा है कि इन दोनों सीटों के उपचुनाव के नतीजे उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 में होने वाले विधानसभा के चुनावों का मूड तय करेंगे.

इस उपचुनाव में बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार नहीं हैं और ना ही बसपा किसी का समर्थन कर रही है.

चुनाव लड़ रही पार्टियों के कार्यकर्ताओं का जोश किसी आम चुनाव से कम भी नहीं है.

यह दोनों सीटें इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं कि वर्ष 2013 में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक तनाव फैला था और भारतीय जनता पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के कई नेताओं पर इलाके में भड़काने वाले भाषण देने और माहौल बिगाड़ने के आरोप लगे थे.

कुछ नेता तो दंगों के आरोपी भी हैं. इस बार फिर यही नेता उपचुनाव के दंगल में दो-दो हाथ कर रहे हैं. एजेंडा तय है, वो है मतदाताओं के ध्रुवीकरण का. यहाँ विकास मुद्दा नहीं है.

'क्यों नहीं है' मैंने पूछा तो मुज़फ़्फ़रनगर से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार कपिल देव अग्रवाल का कहना था, "विकास की बात बाद में करेंगे. पहले बेटियों का, लड़कियों का सम्मान सुरक्षित रहे. हमारा सम्मान ही सुरक्षित नहीं है. ख़ौफ़ का माहौल है."

दंगों के आरोपी भाजपा के कई नेता प्रचार में ज़ोरदार तरीके से लगे हुए हैं और उनपर एक बार फिर भड़काने वाले बयान देने के आरोप लग रहे हैं. उन पर लव जिहाद और गोहत्या के मुद्दों को लेकर नफ़रत फैलाने के आरोप भी हैं.

मुज़फ़्फ़रनगर में जगह-जगह लगे पार्टी के चुनावी पोस्टरों में भी 'बहू बेटियों के सम्मान' की बात ही लिखी हुई है.

शहर की ज़िला परिषद के बाज़ार में चुनावी रैलियों के दौरान बीबीसी से बात करते हुए कपिल देव अग्रवाल समाजवादी पार्टी की सरकार पर अल्पसंख्यकों के तुष्टिकरण का आरोप लगाते हैं और उनका दावा है कि इस उपचुनाव को राज्य सरकार के कामकाज के रिपोर्ट कार्ड के रूप में देखना चाहिए.

कपिल देव अग्रवाल और उनके प्रचार में लगे कार्यकर्ता 'लव जिहाद' को ही मुख्य मुद्दा बनाते हुए लोगों के बीच जा रहे हैं.

दूसरे राजनीतिक दल भी इस हमाम में कुछ अलग नहीं हैं. विवादों में रहने वाले कांग्रेस के नेता इमरान मसूद भी इसमें पीछे नहीं हैं.

सहारनपुर के रहने वाले इमरान मसूद भी इस उपचुनाव के लिए इलाके में कैंप किए हुए हैं और जन सभाओं में वो युवकों को अपने आक्रामक तेवर और उत्तेजक भाषणों से रिझाने की कोशिश में लगे हुए हैं.

हालांकि मुज़फ़्फ़रनगर सीट से समाजवादी पार्टी के गौरव स्वरूप का दावा है कि सिर्फ़ उनकी पार्टी ही विकास की बात कर रही है.

उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर इलाके में एक बार फिर सांप्रदायिक माहौल ख़राब करने का प्रयास करने का आरोप लगाया है.

समाजवादी पार्टी भी इस उपचुनाव में अपनी पूरी ताक़त झोंक रही है. पूरे प्रदेश से पार्टी के नेता और मंत्री मुज़फ्फ़रनगर में कैंप किए हुए हैं. गौरव स्वरूप की प्रचार सभाओं में भी लोगों की भीड़ उमड़ रही है. मगर इस सीट पर कांग्रेस के सलमान सईद ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दीं हैं.

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आज भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है और किसान गन्ने के समर्थन मूल्य को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. मगर सम्प्रदाय के नाम पर ध्रुवीकरण के प्रयासों ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इस उपचुनाव में मूल मुद्दों को ठंडे बस्ते में डाल दिया है.

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