राम नहीं 'भीम' लगाएंगे बेड़ा पार

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बहुजन समाज पार्टी की नेता और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं को उत्तर प्रदेश में तीन सीटों पर हो रहे उपचुनाव से दूर रहने को कहा है.

मायावती का फरमान सभी जिलों के अध्यक्षों तक पहुंचा दिया गया है और उनसे यह भी कहा गया है कि नेता न तो इस उपचुनाव में हिस्सा लें और न किसी को वोट दिलवाने का काम करें.

उन्होंने तो बड़े नेताओं को मतदान तक विधानसभा क्षेत्रों से ही बाहर रहने की सलाह दी है.

बसपा के मुज़फ़्फ़रनगर ज़िला अध्यक्ष कमल गौतम कहते हैं कि उनकी पार्टी वैसे भी उपचुनावों में हिस्सा नहीं लेती है. इसलिए वह और पार्टी के दूसरे नेता पश्चिमी उत्तर प्रदेश की दो सीटों पर हो रहे उपचुनाव की पूरी प्रक्रिया से ही दूर हैं.

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हालांकि बसपा के नेताओं का कहना है कि वह अपने मतदातों से यह भी नहीं कह रहे हैं कि वह किस पार्टी को वोट दें. इसलिए कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी इस उपचुनाव में दलितों के बीच खासी मेहनत कर रही है.

भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय नेताओं का कहना था कि पिछले लोकसभा के चुनावों के दौरान उत्तर प्रदेश में दलितों का अच्छा-ख़ासा वोट उन्हें मिला था. इसलिए इस बार उपचुनाव में बसपा की ग़ैर मौजूदगी का वो पूरा फायदा उठाना चाहते हैं.

हांलाकि हैदराबाद में रोहित की आत्महत्या के बाद भाजपा को इसके लिए काफ़ी मेहनत करनी पड़ रही है. देवबंद और मुज़फ़्फ़रनगर की सीटों से लड़ रहे भाजपा के दोनों प्रत्याशी दलितों के बीच जाकर अपने एजेंडे की बात जोर-शोर से कर रहे हैं.

संघ के कार्यकर्ता भी वर्ष 2017 में होने वाले विधानसभा के चुनावों के लिए पहले से ही तैयारी में लगे हुए हैं और दलित, पिछड़े वर्ग की आबादी वाले इलाकों में संगठन को मज़बूत करने का काम कर रहे हैं.

भाजपा के एक स्थानीय नेता ने बातचीत के दौरान कहा कि लोकसभा चुनाव की तरह उन्हें आने वाले विधानसभा के चुनावों में 'भीम' का साथ चाहिए और वो उसके लिए काम भी कर रहे हैं.

हाल ही में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बसपा के कद्दावर नेता ठाकुर अनिल सिंह को भाजपा ने अपने साथ शामिल कर लिया.

देवबंद के रनखंडी गाँव में चुनावी सभा के दौरान संगीत सोम, सुरेश राणा और ठाकुर अनिल सिंह दलितों के बीच 'जय भीम' के नारे का उद्घोष करते हुए उनका साथ मांगते नज़र भी आए.

भाजपा के स्थानीय नेताओं का कहना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की दो सीटों के उपचुनाव भाजपा को आगामी विधानसभा के चुनावों के लिए अपनी रणनीति बनाने में मदद करेंगे.

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कांग्रेस को भी लगा कि शायद रोहित की आत्महत्या के मुद्दे को लेकर वह दलितों के बीच काम कर सकती है.

इसलिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दो सीटों पर प्रचार के लिए पार्टी ने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार और अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष पीएल पूनिया को मैदान में उतारा है.

इसके अलावा पार्टी के कई दलित चेहरे भी प्रचार में लगे हुए हैं.

फैजाबाद की एक सीट पर हो रहे उपचुनाव में ऑल इंडिया मजलिस इत्तेहादुल मुस्लिमीन यानी एआईएमआईएम ने एक दलित को टिकट दिया और पार्टी के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने प्रचार के दौरान 'जय मीम, जय भीम' का नारा दिया.

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ओवैसी का वैसे तो उत्तर प्रदेश की राजनीति में उतना प्रभाव नहीं है, मगर उनके नारे के बाद समाजवादी पार्टी और कांग्रेस में 'मीम और भीम' के लिए होड़ लग गयी है.

बसपा उपचुनाव में नहीं है इसलिए कांग्रेस और समाजवादी पार्टी 'मीम और भीम' के बीच पैठ बनाने में लगे हुए हैं. वहीं भारतीय जनता पार्टी को लोकसभा के चुनावों की तरह सिर्फ 'भीम' का साथ चाहिए.

मगर जानकारों को लगता है कि वर्ष 2017 में होने वाले विधानसभा के चुनावों में परिस्थितियाँ बदली हुई होंगी क्योंकि बदले हुए राजनीतिक समीकरणों में बसपा एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में उभरेगी.

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इसलिए उपचुनाव में न उतरकर बसपा ने अपनी पूरी ऊर्जा वर्ष 2017 के फाइनल मैच के लिए बचा कर रखी है.

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