प्यार, मनुहार के लिए हज़ारों क़िस्म के गुलाब

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Image caption वेलेंटाइन डे पर गुलाब की क़ीमत बढ़ जाती है.

भारत में गुलाब को 'फूलों का राजा' कहा जाता है, तो यूरोप में इसे 'फूलों की रानी' कहते हैं.

बीते कुछ सालों में भारतीय समाज, ख़ासकर शहरों, में वैलेंटाइन डे के दिन प्रेमी-प्रेमिकाओं के बीच गुलाब का फूल देने का चलन बढ़ा है.

इसका असर यह हुआ है कि दिल्ली में दस रुपए में बिकने वाला गुलाब वैलेंटाइन डे के दिन पचास रुपए में बिक रहा है.

दिल्ली के गाज़ीपुर फूल मंडी के अध्यक्ष तेज सिंह का कहना है कि इसमें कोई दो राय नहीं कि जब से भारत में वैलेंटाइन डे का चलन बढ़ा है, गुलाब की मांग में तेज़ी आई है.

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Image caption गुलाब की कई किस्में हैं, पर डच रोज़ की बात ही कुछ और है .

इतना ही नहीं वैलेंटाइन डे पर इसकी क़ीमत में भारी उछाल आ जाता है.

इंडिया रोज़ फ़ेडरेशन के दिल्ली के सदस्य राहुल कुमार का कहना है कि बीस साल पहले गुलाब का व्यापार इतने ज़ोरों पर नहीं था.

अभी तो हाल यह है कि सिर्फ़ वैलेंटाइन डे के लिए पुणे और बेंगलुरू में डच रोज़ उगाया जाता है.

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Image caption रोज़ फेडरेशन ऑफ़ इंडिया गुलाब की नई क़िस्मों पर काम करता है

राहुल कुमार का दावा है कि देश के तमाम बड़े शहरों की सड़कों पर पहले भीख मांगने वाले बच्चे अब गुलाब के फूल बेचते नज़र आते हैं.

इंडिया रोज़ फेडरेशन ने गुलाब की कई क़िस्मे ईजाद की हैं.

भारतीय मूल की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला के नाम पर भी गुलाब की एक क़िस्म है.

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Image caption गुलाब की इस किस्म का नाम 'हीमा' है

साल 1978 में गुलाब की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए में मुबई में शुरू हुआ था इंडियन रोज़ फ़ेडरेशन. उस समय वैलेंटाइन डे का इतना चलन नहीं था.

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Image caption आबरा का डाबरा

राहुल कुमार के अनुसार अकेले भारत में गुलाब की पांच हज़ार क़िस्में पाई जाती है.

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Image caption देसी गुलाब, जिसमे खुशबू ज़्यादा होती है

दिल्ली में फूलों की दुकान लगाने वाले अंशुल का कहना है कि आज तक कोई भी फूल गुलाब की जगह नहीं ले पाया है.

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Image caption इस गुलाब का नाम 'आबरा का डाबरा' है

तेज सिंह का कहना है कि कई बार वैलेंटाइन डे पर इतनी भीड़ हो जाती है कि इसके आगे दीवाली भी फीकी लगने लगती है.

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Image caption कल्पना चावला

मंडी में गुलाब का एक गुच्छा औसतन 150 रुपए का मिल रहा है, दस दिन पहले तक इसकी क़ीमत 80 रुपए थी.

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