'संदेश स्पष्ट- जो रास्ते में आएगा, पीटा जाएगा'

दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट परिसर में पत्रकारों से सोमवार को मारपीट के मामले पर अब सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा.

करीब 800 पत्रकारों ने भारत के चीफ़ जस्टिस को एक मेमोरैंडम लिखकर आज इसकी मांग की है.

पत्रकारों ने प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया से एक बड़ा मार्च निकाला. उन्होंने मारपीट के समय सरकार और पुलिस के कोई कदम ना उठाने पर सवाल उठाए हैं.

अंग्रेज़ी न्यूज़ चैनल, 'एनडीटीवी' की कन्सलटिंग एडिटर बरख़ा दत्त ने कहा, "मारपीट के वीडियो देखकर ज़ाहिर होता है कि पुलिस ने पत्रकारों की कोई मदद नहीं की, सरकार को अब फौरन कार्रवाई कर ये साबित करना होगा कि वो दिल्ली पुलिस को शह नहीं दे रही है."

'इंडिया टुडे' समूह के कन्सलटिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई ने इस पूरे मामले को लोकतंत्र के समर्थकों और लोकतंत्र में विश्वास ना करनेवालों के बीच की लड़ाई बताया.

'द सिटिज़न' अख़बार की मुख़्य संपादक सीमा मुस्तफ़ा ने बीबीसी से कहा, "बिहार चुनाव के बाद इस सरकार ने जो रुख अपनाया है ये एक शोडाउन जैसा है. जो भी इनके रास्ते में आएगा, वो पीटा जाएगा, फिर चाहे वो मीडिया ही क्यों ना हो."

प्रदर्शन में सुप्रीम कोर्ट के कुछ व़कीलों ने भी पत्रकारों के साथ अपना समर्थन जताने के लिए हिस्सा लिया.

वकील कबीर दीक्षित ने कहा, "वकालत के पेशे में भी सड़न आ गई है, अदालतों में हिंसा एक बड़ा मुद्दा है और ये इकलौता मामला नहीं है. हम यहां यही कहने आए हैं कि हम पत्रकारों के साथ हैं और न्याय व्यवस्था और पत्रकारिता के बीच ऐसी दरार आना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है."

इस बीच अदालत में मारपीट का शिकार हुए पत्रकारों के समूह ने इंडियन वुमेन प्रेस कोर की अध्यक्षता में केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात की है.

आइबीएन 7 के वरिष्ठ पत्रकार अमित पांडे ने बीबीसी को बताया कि उन्हें पहले कोर्ट के परिसर के अंदर और फिर बाहर क़रीब 10 लोगों ने मारा था.

अमित ने कहा, "मैं 10 सालों से कोर्ट रिपोर्टिंग कर रहा हूं पर अदालत के अंदर ऐसा रावण-राज जैसा माहौल नहीं देखा, पुलिसकर्मी भी सब चुपचाप देख रहे थे, किसी ने कोई मदद नहीं की."

अमित के मुताबिक गृह मंत्री ने घटना को 'लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण' बताया और 'उचित कार्रवाई' का आश्वासन दिया है.

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