'भारत माता की जय और मां-बहन की गालियां'

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा

बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकारों की अपील पर सुनवाई करते हुए आश्वासन दिया था कि अदालत में पत्रकारों को जाने की पूरी इजाज़त है और अदालती परिसर में किसी प्रकार की हिंसा बर्दाश्त नहीं की जा सकती है.

लेकिन ऐसा लगता है कि पटियाला हाउस कोर्ट के कुछ वकीलों पर इसका कोई असर नहीं हुआ.

बुधवार को जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया की पेशी से पहले एक बार फिर वकीलों ने पत्रकारों और कन्हैया के समर्थकों के साथ मारपीट की है.

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पेशी दो बजे होनी थी लेकिन मैं थोड़ा पहले लगभग एक बजे पटियाला हाउस कोर्ट पहुंच गया.

सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार केवल पांच पत्रकारों को जज के चैम्बर में जाने की इजाज़त थी, वे सभी समाचार एजेंसियों से जुड़े पत्रकार थे. लेकिन परिसर में किसी भी पत्रकार के जाने पर कोई पाबंदी नहीं थी.

मैं भी परिसर में अंदर चला गया. मेरे पास न कैमरा था, न पत्रकारों जैसे कोई बैग इसलिए किसी ने मुझ पर शक नहीं किया कि मैं भी पत्रकार हो सकता हूँ. इसके अलावा मैं अपने एक वकील मित्र के साथ था.

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लगभग डेढ़ बजे अचानक भारी संख्या में वकीलों का एक गुट पटियाला हाउस कोर्ट के गेट नंबर दो की तरफ़ आया जहां पत्रकार खड़े थे.

वो हाथों में तिरंगा लिए ‘भारत माता की जय,’ ‘वंदे मातरम’ और ‘ग़द्दारों को फांसी दो’ जैसे नारे लगा रहे थे और माँ-बहन की गालियाँ भी गूंज रही थीं.

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लेकिन थोड़ी ही देर के बाद वकीलों का एक समूह उनसे अलग हो गया और वे लोग अंदर चले गए. विक्रम चौहान और उनके समर्थक वहीं मौजूद रहे. ये वही चौहान हैं जिनकी अगुवाई में सोमवार को वकीलों के एक समूह ने जेएनयू के छात्रों, शिक्षकों और पत्रकारों को पीटा था.

लेकिन तभी वहां खड़े एक व्यक्ति ने ‘कन्हैया ज़िंदाबाद’ और ‘तानाशाही नहीं चलेगी’ के नारे लगाना शुरू कर दिया.

फिर क्या था, चौहान के समर्थक वकील उन पर टूट पड़े. बाद में उनमें से एक कन्हैया (संयोग से उनका भी नाम कन्हैया है) ने बीबीसी को बताया कि क़रीब दस की संख्या में वे लोग हरियाणा के सोनीपत से आए थे, ये सभी लोग वामपंथी छात्र संगठन एआईएसएफ़ से जुड़े हैं, वे कन्हैया कुमार के समर्थन में कोर्ट आए थे.

Image caption सोनीपत से आए एआईएसएफ़ छात्र ने बताया कि वकीलों के एक झुंड ने उसे मारा.

उन्होंने बताया कि उनके साथियों में से क़रीब 5-6 ख़ुद वकील भी हैं.

जब वकील उन लोगों को पीट रहे थे तो उसी जगह पर नेटवर्क-18 समूह के अंग्रेज़ी वेबसाइट फ़र्स्टपोस्ट डॉट कॉम के पत्रकार तारिक़ अनवर भी थे. उन्होंने अपने मोबाइल से वकीलों की तस्वीर ले ली.

एक वकील ने उन्हें ऐसा करते देख लिया और फिर कई वकील उन्हें घसीटकर ले गए और लात-घूंसों से मारने लगे.

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लेकिन कुछ देर बाद फिर कुछ वकीलों ने ही उन्हें अपने घेरे में ले लिया और गेट नंबर से दो के पास ले आए. इस बीच वकील गेट नंबर दो को बंद कर चुके थे और किसी को न अंदर आने दे रहे थे और न ही किसी को बाहर जाने दे रहे थे.

तारिक़ वहां खड़े गिड़गिड़ाते रहे कि गेट खोलकर उन्हें जाने दें लेकिन पुलिस वाले वहां ख़ामोश तमाशबीन बने रहे. जब गेट के बाहर खड़े पत्रकारों ने तारिक़ को पहचान लिया और चिल्लाने लगे कि उन्हें बाहर आने दो, तब कहीं जाकर पुलिस ने उन्हें गेट खोलकर बाहर निकलने दिया.

Image caption हंगामा करने वाले वकीलों ने फ़र्स्ट पोस्ट के रिपोर्टर तारिक़ अनवर के फ़ोन से तस्वीर जबरदस्ती डिलीट कराई.

इससे पहले भी दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में सोमवार को जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार की देशद्रोह मामले में पेशी के दौरान छात्रों और पत्रकारों से मारपीट की गई थी.

इसके विरोध में 16 फ़रवरी को क़रीब 800 पत्रकारों ने प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया से एक बड़ा मार्च निकाला था और इस मामले पर भारत के मुख्य न्यायाधीश को एक मेमोरैंडम भी दिया था.

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