'किसानों की आत्महत्या फ़ैशन बन गया है'

जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को मध्य प्रदेश में किसान फ़सल बीमा योजना की शुरुआत कर रहे थे, एक भाजपा सांसद का बयान सामने आया कि आत्महत्या आज किसानों में फ़ैशन बन गया है.

उत्तर मुंबई के भाजपा सांसद गोपाल शेट्टी ने बोरीवली में कहा कि किसान आत्महत्या भूख और कर्ज़ की वजह से नहीं है बल्कि आत्महत्या को लेकर किसानों में फैशन सा चल पड़ा है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ गोपाल शेट्टी ने कहा, ''किसानों की आत्महत्या की सभी घटनाएं केवल भूख और बेरोज़गारी की वजह से नहीं हुई हैं. यह उनमें फ़ैशन और चलन बन गया है. अगर महाराष्ट्र सरकार पांच लाख रुपए देती है, तो कोई और सरकार सात या आठ लाख रुपए दे देगी. यहां किसानों को पैसे देने की प्रतियोगिता चल रही है.''

राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने शेट्टी के इस बयान को असंवेदनशील बताया है.

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Image caption भाजपा सांसद गोपाल शेट्टी के बयान पर सोशल मीडिया में चर्चा.

मुंबई कांग्रेस के नेता संजय निरुपम ने कहा, ''ऐसे समय जब महाराष्ट्र कृषि की समस्या से सबसे ज्यादा जूझ रहा है, ऐसे में शेट्टी का यह बयान दिखाता है कि वो और उनकी पार्टी कर्ज़ और घाटे की वजह से आत्महत्या करने वाले किसानों के प्रति कितने संवेदनशील हैं.''

महाराष्ट्र में इस साल जनवरी से अबतक 124 किसान आत्महत्या कर चुके हैं.

गोपाल शेट्टी के बयान की आलोचना हो रही है. ट्विटर पर हरकमल संधू (@sandhuharry80) लिखते हैं, ''क्या आत्महत्या भी फ़ैशन हो सकता है. एक व्यक्ति ऐसा सोचता है. अधिक जानकारी के लिए भाजपा सांसद गोपाल शेट्टी से संपर्क करें.''

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वहीं पंकज (@pankajcgupta) ने लिखा, ''प्रिय भाजपा सांसद गोपाल शेट्टी, आप फ़ैशन और ट्रेंड के बारे में जानते हैं? अनाप-शनाप बोलना और साक्षी महाराज और आज़म ख़ान की तरह ट्विटर पर ट्रेंड करना.''

सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया (@anjali_damania) ने ट्विटर पर लिखा है, ''जनवरी में 124 किसानों ने आत्महत्या की. आज प्रधानमंत्री बीमा योजना पर बात करेंगे. लेकिन भाजपा सांसद गोपाल शेट्टी को लगता है कि आत्महत्या एक फैशन है.''

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरूवार को मध्‍य प्रदेश के सिहोर में आयोजित किसान कल्‍याण मेले में किसानों को संबोधित करेंगे और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए दिशा-निर्देश जारी करने वाले हैं.

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ये योजना आगामी खरीफ फसलों के लिए लागू होनी है. जिसके तहत खरीफ की फसलों के लिए दो फ़ीसद और रबी की फसलों के लिए किसानों को डेढ़ फ़ीसद प्रीमियम का भुगतान करना होगा.

बागवानी फसलों के लिए इस योजना के तहत प्रीमियम की दर पांच फ़ीसद होगा.

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