हेडली पर यक़ीन करने वालों के सामने ये 7 सवाल

इमेज कॉपीरइट AP

इशरत जहाँ केस में पूर्व डीआईजी डीजी बंजारा की तरफ़ से कोर्ट में पैरवी करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता वीडी गज्जर का कहना है कि इशरत मामले में डेविड कोलमैन हेडली का बयान कोई मायने नहीं रखता क्योंकि उनकी गवाही मुंबई हमलों के संदर्भ में है.

पाकिस्तानी-अमरीकी नागरिक हेडली उर्फ़ सैयद दाऊद गिलानी ने अमरीका से वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए मुंबई की एक अदालत को कई जानकारियां दी थी.

गज्जर ने कहा कि बंजारा की लड़ाई आतंकवाद के ख़िलाफ़ थी और उन्हें हेडली जैसे चरमपंथी की मदद और दया की ज़रूरत नहीं है.

इमेज कॉपीरइट AP

उधर, मानवाधिकार कार्यकर्ता और इशरत की मां का पक्ष रखने वाले शमशाद पठान ने बीबीसी से कहा कि हेडली के बयान को लेकर भाजपा नेताओं की ख़ुशी कोई वजूद नहीं रखती क्योंकि जो बात कोर्ट के सामने है, उसे नकारा नहीं जा सकता.

शमशाद पठान ने कहा कि हेडली की गवाही के आधार पर जो बयानबाज़ी हो रही है, उसके कम से कम 7 ऐसे पहलू हैं जिनका जवाब हेडली की बात पर यक़ीन करने वालों को देना होगा.

1- लश्कर-ए-तैयबा की स्टोरी 14 जून 2004 के पहले ही लिखी जा चुकी थी और फ़र्ज़ी मुठभेड़ की इजाज़त काली और सफ़ेद दाढ़ी से मिल चुकी थी- डीएच गोस्वामी (फ़र्ज़ी मुठभेड़ में शामिल और गुजरात के रिटायर्ड पुलिस उप अधीक्षक)

2- क्राइम ब्रांच ने पहले से चारों व्यक्तियों को मारकर कोतरपुर वाटर वर्क्स पर डाल दिया और मीडिया को बुलाकर यह कहानी बताई कि ये लश्कर के आतंकवादी थे और नरेंद्र मोदी को मारने के लिए आए थे. लेकिन यह पटकथा पहले ही लिखी जा चुकी थी. ये बात फ़र्ज़ी मुठभेड़ में शामिल डीएच गोस्वामी और दूसरे पुलिसवालों के बयान में दर्ज है.

3- 2004 से 2009 तक इस केस की जांच क्राइम ब्रांच के पास थी, लेकिन न ही क्राइम ब्रांच ने और न ही तत्कालीन मुख्यमंत्री और अब प्रधानमंत्री मोदी ने इसकी जांच में कोई दिलचस्पी दिखाई. इसके लिए कोर्ट ने जांच एजेंसी की खिंचाई भी की थी.

इमेज कॉपीरइट AP

4-गुजरात हाई कोर्ट के न्यायाधीश कल्पेश जवेरी ने इस मुठभेड़ की जांच करने के लिए प्रमोद कुमार की अध्यक्षता में गुजरात राज्य के तीन आईपीएस अधिकारियों की एसआईटी गठित की थी. इसी बीच 7 सितंबर 2009 को अहमदाबाद मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट एसपी तमांग ने अपनी जांच में पाया कि इन चारों व्यक्तियों की पहले ही हत्या कर दी गई थी और बाद में एनकाउंटर ज़ाहिर किया गया. उन्होंने इस फ़र्ज़ी मुठभेड़ के लिए 22 पुलिसवालों को ज़िम्मेदार ठहराया था.

लेकिन सरकार ने मजिस्ट्रेट रिपोर्ट को गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती दे डाली. अगले ही दिन एक अभूतपूर्व घटना में गुजरात हाईकोर्ट में रात के आठ बजे तक चली सुनवाई में तमांग के रिपोर्ट पर स्टे लगा दिया गया.

इस पर पीड़ितों की तरफ़ से जस्टिस जवेरी के स्टे को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए न सिर्फ़ स्टे हटाया, बल्कि गुजरात हाई कोर्ट को निर्देश दिया कि इस केस की सुनवाई के लिए डिवीज़न बेंच का गठन करे. जिस पर गुजरात हाई कोर्ट की डिवीज़न बेंच की बनाई हुई एसआईटी की रिपोर्ट में कहा गया कि क्राइम ब्रांच की लश्कर-ए-तैयबा की स्टोरी फ़र्ज़ी है और चारों लोगों को पहले ही हत्या कर एनकाउंटर ज़ाहिर कर दिया गया था. यह रिपोर्ट आईपीएस राजीव रंजन वर्मा, मोहन झा और सतीश वर्मा ने दी थी.

इमेज कॉपीरइट pti

5- इसके बाद हाईकोर्ट ने पूरी जांच के लिए मामला सीबीआई को सौंप दिया. सीबीआई ने इस मामले की जांच कर अभी तक पूर्व आईबी चीफ़ राजेन्द्र कुमार सहित कुल 12 लोगों के ख़िलाफ़ चार्जशीट दायर कर दी है.

6- सीबीआई की जांच में सामने आया कि आईबी और गुजरात पुलिस के अधिकारियों ने फ़र्ज़ी कहानी बनाकर हत्या जैसे गुनाह को अंजाम दिया और गुजरात के 12 से ज़्यादा पुलिसवालों ने सीआरपीसी की धारा 164 के मुताबिक़ निवेदन दिया कि लश्कर-ए-तैबा की पूरी फ़र्ज़ी कहानी इन चारों लोगों की मौत के पहले ही लिखी जा चुकी थी.

7- अभी तक केंद्र की भाजपा सरकार ने आईबी अधिकारियों के ख़िलाफ़ केस चलाने की अनुमति नहीं दी है.

इमेज कॉपीरइट BBC World Service

तो सवाल उठता है कि क्या हेडली का बयान एसआईटी, सीबीआई, मजिस्ट्रेट जांच और मुठभेड़ में शामिल पुलिसवालों के बयान से ज़्यादा अहम है?

राजेंद्र कुमार जिन पर इशरत और 3 लोगों की हत्या जैसे संगीन आरोप में चार्जशीट हो चुकी है वो अब ये कह रहे हैं कि मोदी को फंसाने के लिए इशरत के एनकाउंटर को फ़र्ज़ी बताया जा रहा है.

शमशाद पठान कहते हैं कि तराजू के एक पलड़े में हेडली है और दूसरे में सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और सीबीआई. लेकिन भाजपा नेताओं को सिर्फ़ हेडली की आवाज़ ही सुनाई दे रही है. सुप्रीम कोर्ट और सीबीआई ने इस मुद्दे पर कया कहा है, उन्हें वो भी सुनना पड़ेगा.

(बीबीसी हिंदी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार