'छत्तीसगढ़ का सच दबाने की कोशिश'

केमिकल पदार्थ से हमले के बाद सोनी सोरी

वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने छत्तीसगढ़ में आम आदमी पार्टी नेता और समाजसेवी सोनी सोरी पर शनिवार को हुए केमिकल पदार्थ से हमले को ‘सच दबाने की कोशिश’ बताया है.

सोनी सोरी पर हुए हमले के विरोध में सोमवार को कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में छत्तीसगढ़ भवन के सामने प्रदर्शन किया और हमले की स्वायत्त न्यायिक जांच की मांग की.

वहां पहुंचे प्रशांत भूषण ने बीबीसी को बताया, “सोनी सोरी ही नहीं, पत्रकार मालिनी सुब्रह्मण्यम, वकील शालिनी गेरा और वहां काम कर रहे और मानवधिकार कार्यकर्ताओं को धमकाया जा रहा है क्योंकि ये लोग वहां का सच उजागर कर रहे हैं.”

छत्तीसगढ़ को ‘ब्लैक होल’ सा बताते हुए भूषण ने कहा कि, “वहां से जो सत्य बाहर देश को भेजा जा रहा है, उसी को दबाने के लिए ये दमन हो रहा है.”

सोनी के मुताबिक इसी महीने उनके घर मे किसी अज्ञात व्यक्ति ने तीन पर्चे फेंके थे, जिनमें उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई थी.

सोनी का आरोप है कि वो पिछले दिनों आदिवासियों के ख़िलाफ़ सुरक्षा बलों के ओर से प्रताड़ना के मामलों में एफ़आईआर दर्ज करवाने की नाकाम कोशिशें करती रही हैं और इन वजहों से हो सकता है उन्हें निशाना बनाया गया हो.

हाल ही में सोनी से मिलकर और छत्तीसगढ़ में महिलाओं के साथ कथित यौन हिंसा की पड़ताल कर लौटीं कल्याणी मेमन सेन भी प्रदर्शन में शामिल थीं.

सेन ने कहा, “बार-बार ऐसी घटनाओं की स्वायत्त पड़ताल होती है, टीम जाती है और उसके काम में अड़चनें डालने की कोशिश की जाती हैं, हमें धमकियां मिलती हैं और अनौपचारिक तरीके से लोगों की भीड़ जमा कर हमें रोका जाता है.”

इससे पहले, छत्तीसगढ़ में काम कर रही पत्रकार मालिनी सुब्रमण्यम और आदिवासियों की मुफ़्त क़ानूनी मदद करने वाली संस्था जगदलपुर लीगल एड ग्रुप की महिला वकीलों ने आरोप लगाया था कि बस्तर पुलिस की प्रताड़ना के कारण वे जगदलपुर छोड़ने के लिए मजबूर हैं.

शनिवार को छत्तीसगढ़ में हुए हमले के बाद सोनी सोरी को रविवार देर रात दिल्ली के अपोलो अस्पताल लाया गया जहां वो आईसीयू में भर्ती हैं.

उनके चेहरे पर लगाए गए केमिकल पदार्थ की वजह से उनकी त्वचा जल गई है और काली पड़ गई है. होंठ और आंख समेत पूरे चेहरे पर बहुत सूजन है.

अपोलो अस्पताल की विज्ञप्ति के मुताबिक, “सोनी को ठीक होने में अभी कुछ हफ़्ते तक लग सकते हैं. उनकी आंखों की रोशनी फ़िलहाल सलामत है और उनकी जान को ख़तरा नहीं है.”

सोनी सोरी को अक्तूबर 2011 को क्राइम ब्रांच और छत्तीसगढ़ पुलिस के संयुक्त अभियान में माओवादियों के साथ संबंध होने के आरोप में दिल्ली से गिरफ़्तार किया गया था.

पर सोनी पर लगाए गए आठ मामलों में से सात में वो बरी हो चुकी हैं और एक में उन्हें ज़मानत मिली हुई है.

हिरासत में लिए जाने के एक हफ्ते के अंदर ही सोरी ने ये इल्ज़ाम लगाया था कि पुलिस हिरासत में उनके साथ बलात्कार किया गया और उनके गुप्तांगों में पत्थर डाले गए.

सुप्रीम कोर्ट के सामने दिए इस बयान में उस व़क्त दंतेवाड़ा के एसपी अंकित गर्ग का नाम भी लिया गया था हालांकि उस मामले में अभी सुनवाई शुरू नहीं हुई है.

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