जाट आंदोलनः भाई को अस्पताल कैसे ले जाएंगे?

जाट आंदोलन का असर

हरियाणा का सोनीपत शहर भी जाट आंदोलन में झुलस रहा है. न मीडिया वहां जा पा रहा है और न ही वहां से कोई ख़बर आ रही है.

बीबीसी हिंदी के हमारे सहयोगी संजय शर्मा सोनीपत में ही हैं. पढ़िए संजय शर्मा ने क्या बताया सोनीपत के हालात के बारे में और किन हालात से गुज़र रहे हैं वहां के लोग-

पिछले तीन दिनों से सोनीपत शहर में न कोई आ सकता है और न ही जा सकता है. न बस चल रही है और न ही ट्रेन चल रही है.

यूं मैं आम तौर पर रात 8 बजे तक घर पहुंच जाता हूँ. लेकिन शुक्रवार को जब मैं दफ़्तर से निकल कर दिल्ली के सब्ज़ी मंडी स्टेशन पहुंचा तो मुझे एक पुलिस वाले ने बताया कि सोनीपत में रेल की पटरियां उखाड़ दी गई हैं और कोई ट्रेन नहीं चल रही है न ही बस उपलब्ध है.

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फिर मैं वापस दफ़्तर आया और टैक्सी ली और रात को 12 बजे जैसे-तैसे घर पहुंचा.

अगले दिन पता चला कि कोई बस नहीं चल रही है और आसपास के क़स्बों में कुछ वाहन जला दिए गए हैं.

24 फ़रवरी को मेरे बड़े भाई की दिल्ली के एम्स में ब्रोंकोस्कोपी होनी है लेकिन अब पता नहीं कि कैसे हम लोग दिल्ली पहुंचेंगे.

सोनीपत में भी अस्पताल बंद हैं, दवा की दुकानें बंद हैं. आसपास के गांवों से दूध आता है लेकिन वो भी बंद हो गया है. दूध पाउडर से काम चलाना पड़ रहा है.

सब्ज़ियां मिल रही हैं लेकिन बहुत महंगी हो गई है. क़़ीमतें दोगुनी हो गई हैं. बाज़ार बंद हैं, स्कूल कॉलेज बंद हैं. इंटरनेट को सरकार ने बंद कर दिया है.

अच्छी बात सिर्फ़ ये है कि बिजली और पानी की सप्लाई चालू है. लोगों में सरकार के ख़िलाफ़ भी बहुत ग़ुस्सा है. आठ दिन से आंदोलन चल रहा है.

फिर सरकार ने समय पर कोई कार्रवाई नहीं की. हैरान करने वाली बात ये है कि दूर-दूर तक पुलिस नज़र नहीं आती.

अब लोग उम्मीद कर रहे हैं कि मामले का कोई हल जल्दी से निकले.

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