दंगाइयों पर सख़्त कार्रवाई होगी : खट्टर

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हरियाणा सरकार ने कहा है कि जाट आंदोलन के दौरान हिंसा और तोड़फोड़ करने वाले लोगों की पहचान कर उनके ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की जाएगी.

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर मंगलवार को हिंसा से प्रभावित रोहतक में लोगों को संबोधित कर रहे थे. वहां मौज़ूद लोगों ने मुख्यमंत्री के भाषण के दौरान काफ़ी शोर किया और नारे लगाए और अपनी बात रखने के लिए मुख्यमंत्री को बार बार- 'सुनो, सुनो तो सही' चिल्लाना पड़ा.

मुख्यमंत्री ने कहा कि जाट आंदोलन के दौरान लोगों को हुए नुक़सान का आकलन करवाकर पीड़ित लोगों को एक महीने में पूरा मुआवज़ा दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि इस काम में किसी तरह की कोताही नहीं की जाएगी.

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इसके बाद आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में खट्टर पत्रकारों के सवाल पर भड़क गए. संवाददाताओं ने उनसे पूछा कि रोहतक में सेना क्यों तैनात की गई थी, जब वह हिंसा रोकने में नाकाम रही, आखिर सेना तैनात ही क्यो गई थी.

इस सवाल के जबाव में मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से पूछा कि वो किस हैसियत से सवाल पूछ रहे हैं, पत्रकार की तरह या जनता की तरह.

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जाट आंदोलन पर केंद्र सरकार से कुछ जाट प्रतिनिधियों की बातचीत के बाद राज्य में स्थिति सुधरने के संकेत हैं. हालाँकि सोमवार को कुछ जगह पर हिंसा फिर भड़कने से दो लोगों की मौत के साथ राज्य में इस आंदोलन में मरने वालों की संख्या 18 हो गई है.

समाचार एजेंसियों के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्ग एक पर यातायात सामान्य हो गया है. ये राजमार्ग दिल्ली को अमृतसर से जोड़ता है और हरियाणा के प्रमुख ज़िलों से होकर जाता है.

इसके पहले प्रदेश सरकार ने जाट आंदोलन के दौरान कथित तौर पर भड़काने वाली एक ऑडियो क्लिप की जांच कराने की घोषणा की थी.

ग़ौरतलब है कि इस ऑडियो क्लिप में पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा के राजनीतिक सलाहकार प्रोफ़ेसर वीरेंद्र सिंह की आवाज़ बताई जा रही है.

मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने एक ट्वीट में प्रोफ़ेसर वीरेंद्र सिंह का नाम लेते हुए कहा है, 'मंत्रिमंडल ने फ़ैसला किया है कि जाट आरक्षण आंदोलन को भडक़ाने की कोशिश करने वाले प्रोफ़ेसर वीरेन्द्र सिंह की ऑडियो क्लिप की जांच होगी.'

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उधर, मीडिया में छपे और यू-ट्यूब पर उपलब्ध प्रोफ़ेसर वीरेंद्र सिंह के बयान में इन सभी आरोपों का खंडन किया. प्रोफ़ेसर वीरेंद्र सिंह के अनुसार, "मैंने कहीं भी जाटों को या किसी और को भड़काने की बात नहीं कही है. ये बातचीत पुरानी है और इस आंदोलन से बहुत पहले की है. मैंने तो शांति बनाए रखने की बात कही है. इस क्लिप से छेड़छाड़, एडिटिंग हुई है, यदि आप पूरा क्लिप सुनें तो आप मुझसे सवाल ही नहीं पूछेंगे."

मुख्यमंत्री खट्टर ने ट्वीट कर ये भी कहा है कि जाट आंदोलन के दौरान काम में चूक के लिए सिविल व पुलिस प्रशासन के सभी अधिकारियों की भूमिका का जायज़ा लिया जाएगा.

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एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में निजी संपत्तियों के नुकसान का आकलन करने के लिए भी तैनात किया जाएगा.

राज्य सरकार का कहना है कि आंदोलन के दौरान हुए नुक़सान के मुआवज़े का दावा करने वाला एक फॉर्म उपायुक्त कार्यालय में व ऑन लाइन उपलब्ध कराया जाएगा और आकलन के बाद एक महीने के भीतर मुआवजा दिया जाएगा.

रविवार को इस मुद्दे पर गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने जाट समुदाय के कुछ प्रतिनिधियों को आश्वासन दिया था कि जाटों की मांगें हरियाणा विधानसभा के अगले सत्र में मान ली जाएँगी, लेकिन आंदोलनकारियों का स्पष्ट नेतृत्व न होने के कारण ज़मीन पर इसका कितना होगा, ये कहना मुश्किल है.

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