जब जज ने कहा, 'मैं दिमागी संतुलन खो बैठा था'

मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट के न्यायाधीश सीएस कर्णन ने स्वीकार किया है कि निराशा की वजह से मानसिक संतुलन खो देने के कारण उन्होंने 'ग़लत' आदेश जारी किया था.

दरअसल कुछ दिनों पहले खुद के कोलकाता हाईकोर्ट में तबादले के भारत के मुख्य न्यायाधीश के आदेश पर कर्णन ने रोक लगा दी थी. अपने इस रुख के कारण वे कई दिनों से विवादों में थे.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ अपनी ग़लती स्वीकार करते हुए सीएस कर्णन ने भारत के मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के दो जजों न्यायमूर्ति जीएस खेहर और आर भानुमति को एक चिट्ठी लिखी है.

उन्होंने लिखा है कि कुछ जजों के उनकी 'हंसी उड़ाए जाने' के कारण वे परेशान थे.

कर्णन ने लिखा है, "15 फरवरी 2016 को मैंने अपनी मानसिक हताशा के कारण ग़लत आदेश जारी किए. कई घटनाओं के कारण मैं बेचैन था."

चिट्ठी में उन्होंने ये भी लिखा है कि "आज के बाद मैं सबके प्रति दोस्ताना रवैया रखूंगा."

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उन्होंने चिट्ठी में अपनी बात साबित करने के लिए प्रताड़ित और परेशान किए जाने से जुड़ी दो घटनाओं का ज़िक्र किया है. उन्होंने बताया है कि तीन साल पहले उन्होंने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति राष्ट्रीय आयोग के अध्यक्ष को शिकायती पत्र भी भेजा था.

15 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने उनके तबादले का आदेश देते हुए मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को कहा था कि न्यायमूर्ति कर्णन को किसी तरह की न्यायिक जिम्मेदारी ना सौंपी जाए.

कर्णन ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश पर रोक लगाई थी.

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