'मेरा नाम स्मृति ईरानी है, मेरी कौन सी जाति है'

स्मृति ईरानी इमेज कॉपीरइट PTI

हैदराबाद विश्वविद्यालय और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय मामले पर लोकसभा में विपक्ष के सवालों के जवाब देते हुए केंद्रीय मानव संसाधन एवं विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि उन्होंने जातिगत भेदभाव के नज़रिए से कोई कार्रवाई नहीं की है.

उन्होंने सदन में उन आवेदन पत्रों का जिक्र किया जो विभिन्न दलों के सांसदों ने उन्हें सिफ़ारिश और शिकायत के तौर पर लिखा था.

सदन में स्मृति ईरानी बेहद आक्रामक अंदाज़ में दिखीं. स्मृति ईरानी के भाषण की पाँच प्रमुख बातें.

1. स्मृति ईरानी ने कहा कि कांग्रेस के सांसद हनुमंत राव ने उन्हें पत्र लिखा कि हैदराबाद यूनिवर्सिटी में दलित छात्रों की कई आत्महत्याएं हुई हैं और न्याय चाहिए. हनुमंत राव के पत्र के जवाब में उन्होंने हैदराबाद यूनिवर्सिटी को 9 दिसंबर 2014 से लेकर 6 जनवरी 2016 के बीच सात पत्र लिखे थे.

उन्होंने कहा, "मैं अपने कर्तव्य का पालन कर रही थी और आज मुझे लोग सूली पर चढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. अमेठी का चुनाव लड़ने की आप सज़ा दे रहे हैं?"

इमेज कॉपीरइट AP

2. उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता प्रदीप भट्टाचार्य ने बार बार पत्र लिखकर विश्व भारती विश्वविद्यालय में वाइस चांसलर की भर्ती का ये कहते हुए विरोध दर्ज कराया था कि एक महिला पर अत्याचार करने वाले व्यक्ति को इस पद पर बैठा दिया गया.

3-रोहित वेमुला मुद्दे पर उन्होंने कहा कि जिस एक्जिक्यूटिव काउंसिल ने पांच दलित छात्रों को बर्खास्त करने का निर्णय लिया, उसमें शामिल लोगों की नियुक्ति उनकी सरकार ने नहीं बल्कि कांग्रेस की सरकार ने ही की थी.

इमेज कॉपीरइट AFP

4-जेएनयू की जिस जांच समिति ने छात्रों को निलंबित किया वो कांग्रेस के शासन काल में ही नियुक्त किए गए थे. उन्होंने जेएनयू शिक्षकों की एक जांच कमेटी का हवाला भी दिया जिसमें जांच पूरी होने तक निलंबित किए गए छात्रों के नाम लिखे गए थे.

5-उन्होंने कहा, "मेरे ऊपर आरोप लगाया जा रहा है कि मैंने जाति के आधार पर भेदभाव करने की कोशिश की है. मेरा नाम स्मृति ईरानी है, मैं चुनौती देती हूँ, मेरी जाति क्या है कोई बता कर देखे."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार