'संदिग्ध माओवादियों ने 16 की हत्या की'

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पुलिस का कहना है कि छत्तीसगढ़ के नारायणपुर ज़िले में संदिग्ध माओवादियों द्वारा जिन ग्रामीणों की हत्या की गई थी, उनकी संख्या बढ़ कर 16 हो गई है. हालांकि पुलिस अभी तक उन गांवों तक नहीं पहुंची है, जहां से इन कथित हत्याओं की ख़बरें आई हैं.

बस्तर के पुलिस महानिरीक्षक शिवराम प्रसाद कल्लुरी ने दावा किया है कि नारायणपुर ज़िले में मंगलवार सुबह तक 3 ग्रामीणों के मारे जाने की ख़बर थी, लेकिन बुधवार तक ज़िले के पुलिस अधीक्षक के हवाले से जो अंतिम सूचना आई है, उसके अनुसार मृतकों की संख्या संभवतः 16 तक पहुंच गई है.

शिवराम प्रसाद कल्लुरी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा-“16 ग्रामीणों को, 16 बस्तर के आदिवासियों को माओवादियों ने मारा है. तथाकथित मानवाधिकार संगठन जो केवल आतंकवादियों, माओवादियों और प्रतिबंधित संगठनों के मानवाधिकार की बात करते हैं, वो अब अबूझमाड़ के इलाके में जाएँ.”

उन्होंने मानवाधिकार संगठनों और मीडिया से कहा कि वो उन इलाकों में जाये और पता करे कि किन ग्रामीणों की हत्या हुई है. उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि प्रभावित ग्रामीणों को सरकारी नियमानुसार 8 लाख का मुआवजा दिया जा सके.

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इधर मानवाधिकार संगठनों को निशाने पर लिये जाने से नाराज़ छत्तीसगढ़ में पीयूसीएल के अध्यक्ष डॉक्टर लाखन सिंह ने कहा कि पुलिस मानवाधिकार संगठनों को ये न बताये कि उन्हें क्या करना है.

डॉक्टर सिंह ने कहा,“हम हर तरह की हिंसक कार्रवाइयों के खिलाफ हैं. लेकिन यह चकित करने वाली बात है कि अपना काम करने के बजाये पुलिस दूसरों को उपदेश देने में वक़्चत जाया कर रही है. पुलिस दो दिनों में अब तक यह पता नहीं कर पाई है कि आखिर कितने लोग मारे गये हैं. पुलिस को तत्काल प्रभावित इलाके में जा कर वस्तुस्थिति का पता लगाना चाहिए.”

वहीं ज़िले के पुलिस अधीक्षक अभिषेक मीणा ने बीबीसी से बातचीत में कहा, “आमतौर पर माओवादी किसी ग्रामीण को चेतावनी देकर या जन अदालत लगा कर उसकी हत्या करते रहे हैं. लेकिन इस बार पुलिस की कार्रवाई से बौखलाए माओवादियों ने अंधाधुंध तरीके से ग्रामीणों की हत्या की है.”

मंगलवार को ही पड़ोस के सुकमा ज़िले में तेलंगाना और छत्तीसगढ़ की पुलिस ने एक मुठभेड़ में आठ माओवादियों के मारे जाने का दावा किया था.

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