'हनुमान जी अदालत में हाज़िर हों..'

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कुछ साल पहले एक अमरीकी सीनेटर ने भगवान पर मुक़दमा किया था और 'मौत, तबाही और आतंकवाद' जैसी 'उनकी गतिविधियों' के लिए अदालत से स्थायी निषेधाज्ञा जारी करने की मांग की थी.

जज ने इस मामले को यह कहकर ख़ारिज कर दिया कि चूंकि भगवान का कोई सही पता-ठिकाना नहीं है इसलिए उन्हें क़ानूनी काग़ज़ नहीं भेजे जा सकते.

भारत में कई हिंदू श्रद्धालु देवी-देवताओं से नज़दीकी संंबंध मानते हैं और इसे ध्यान में रखते हुए भारतीय न्यायिक व्यवस्था में उन्हें क़ानूनी दर्जा दे रखा है.

इसलिए कई बार उन्हें अदालत में भी घसीट लिया जाता है.

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बीबीसी संवाददाता गीता पांडे ने ऐसे कुछ मामलों का पता लगाया, जब देवी-देवता इंसानी क़ानूनों के दायरे में आए.

फ़रवरी में बिहार की एक अदालत ने हनुमान को 'सरकारी ज़मीन पर अतिक्रमण के लिए' समन जारी किया.

अदालत ने यह क़दम तब उठाया, जब एक सरकारी विभाग ने मजिस्ट्रेट से शिकायत की कि सड़क किनारे का हनुमान मंदिर ट्रैफ़िक रोक रहा है. समन देने गए अधिकारियों ने उसे हनुमान प्रतिमा पर ही चिपका दिया.

बाद में अफ़सरों ने शर्मिंदगी से कहा कि यह 'लिपिकीय भूल' (क्लेरिकल एरर) थी और समन 'मंदिर प्रबंधन के लिए था, न कि भगवान के लिए.'

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इसके बाद उन्होंने हनुमान प्रतिमा पर चिपकाया समन हटाया.

एक वकील ने हाल ही में भगवान राम को 'अपनी पत्नी सीता के साथ अन्याय' के लिए अदालत में घसीटा है.

चंदन कुमार सिंह के मुताबिक़ करोड़ों लोगों की तरह वह भी राम की पूजा करते हैं पर इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता कि राम ने सीता से बुरा बर्ताव किया था.

जज ने मामला ख़ारिज कर दिया कि यह अव्यावहारिक है. चंदन के साथी वकीलों ने उन पर 'सस्ती लोकप्रियता' का आरोप लगाया और उनमें से एक ने चंदन पर मानहानि का केस कर दिया.

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लेकिन चंदन कुमार ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि वह अपील करेंगे 'क्योंकि मुझे सचमुच लगता है कि भारतीयों को मानना चाहिए कि राम ने सीता के साथ बुरा बर्ताव किया था.'

दिसंबर 2007 में संपत्ति का एक विवाद सुलझाने के लिए अदालत ने राम और हनुमान को समन जारी किए थे.

झारखंड की एक अदालत के आदेश के बाद अख़बारों में विज्ञापन देकर इन भगवानों को 'ख़ुद अदालत में पेश होने को' कहा गया था.

ख़बरों के अनुसार इससे पहले दो बार भगवानों को भेजे गए समन 'अपर्याप्त' पते की वजह से लौट आए थे.

यह विवाद धनबाद के 1.4 एकड़ के एक प्लॉट के मालिकाना हक़ को लेकर था जिसमें राम और हनुमान के दो मंदिर थे.

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स्थानीय लोगों का कहना है कि वह ज़मीन भगवान की है पर पुजारी का कहना था कि ज़मीन उनकी है.

मुंबई में हाईकोर्ट ने 2010 में आदेश पारित किया कि भगवान स्टॉक मार्केट में पैसा नहीं लगा सकते.

कोर्ट ने एक धार्मिक ट्रस्ट की याचिका ख़ारिज करते हुए आदेश दिया, जो गणेश समेत पांच भगवानों के नाम पर ट्रेडिंग अकाउंट खोलना चाहता था.

महाराष्ट्र के सांगली के पूर्व राजपरिवार के स्वामित्व वाले ट्रस्ट का कहना था कि भगवानों के सेविंग्स बैंक अकाउंट हैं, इनकम टैक्स कार्ड हैं पर जज नहीं माने.

जजों का कहना था कि शेयर और स्टॉक मार्केट में ख़ास तरह की योग्यता और विशेषज्ञता चाहिए और देवताओं से इसकी उम्मीद करना ठीक नहीं.

उन्होंने कहा, "देवी-देवता पूजा के लिए हैं. उन्हें शेयर ट्रेडिंग जैसी व्यावसायिक गतिविधियों में नहीं घसीटा जाना चाहिए."

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