फ़ेसबुक हैक किया, 15 लाख रुपए इनाम पाया

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा

बैंगलुरू में काम कर रहे सॉफ्टवेयर इंजीनियर आनंद प्रकाश ने फ़ेसबुक को 'हैक' किया जिसके लिए फेसबुक ने उन्हें 15 हज़ार डॉलर (क़रीब 10 लाख) रुपए का इनाम दिया है.

इतना ही नहीं आनंद अभी तक फ़ेसबुक को क़रीब 90 बार और अन्य छोटी-बड़ी कंपनियों की वेबसाइट भी 'हैक' कर चुके हैं. इसके बदले कंपनियां उन्हें इनाम के तौर पर पैसे देती हैं.

वेबसाइट हैक कर आनंद अभी तक 1.04 करोड़ रुपए कमा चुके हैं. आप सोच रहे होंगे कि आख़िर कोई कंपनी खुद को ही हैक करने के बदले में आनंद को इनाम क्यों दे रही है.

आनंद इसका जवाब देते हैं, "ये एथिकल हैकिंग का हिस्सा है और कंपनियां इसे 'बाउंटी रिवॉर्ड' कहती हैं. मैंने फ़ेसबुक के लॉगइन सिस्टम में एक बग का पता लगाया था."

फ़्लिपकार्ट में बतौर सिक्योरिटी एनालिस्ट काम करने वाले आनंद कहते हैं, "इस बग की मदद से कोई भी हैकर किसी के अकाउंट के प्राइवेट मैसेज, फोटो और अन्य जानकारियां हासिल कर सकता था. मैंने 22 फ़रवरी को फे़सबुक को इस बग के बारे में बताया और 2 मार्च को उन्होंने मुझे मेरे इनाम के बारे में सूचित कर दिया."

आनंद समझाते हैं, "अधिकतर कंपनियां वायरस और बग से बचने के लिए सिक्योरिटी कंपनियों को बहुत पैसे देती हैं लेकिन उनमें से अधिकतर केवल ख़ानापूर्ति करती हैं. ऐसे में वे सिक्योरिटी कंपनियां इन्हें काफ़ी महंगी पड़ती हैं."

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा

उनके अनुसार, "एक नया चलन शुरू हुआ है कि फ़ेसबुक, गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां दुनियाभर के हैकरों को उनकी वेबसाइट या प्रोग्राम हैक करने का खुला निमंत्रण देती हैं."

आनंद कहते हैं, "कंपनियों का मक़सद होता है कि दुनियाभर के हैकर उनकी प्रोग्रामिंग में कमियां निकालें और उन्हें इसकी सूचना दें. जिसके बदले में वो उन्हें इनाम देती है. वो उनके लिए भी किफ़ायती होता है."

बग रिपोर्ट करने के मामले में फ़ेसबुक हर साल एक सूची जारी करता है जिसमें वो एथिकल हैकरों की रैंकिंग करता है.

2013 में पूरे विश्व में इस सूची में आनंद का तीसरा स्थान था और 2014 में चौथा.

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Image caption फेसबुक की तरफ से भेजा गया जवाब.

आनंद कहते हैं, "इस साल की लिस्ट भी जारी होने वाली है, उसमें भी मेरी रैंक अच्छी रहने की उम्मीद है."

उन्हें सबसे ज़्यादा मज़ा फ़ेसबुक पर बग का पता लगाने में ही आता है.

वो कहते हैं, "दूसरी कंपनियां इतनी जल्दी आपको जवाब नहीं देती, न ही फ़ेसबुक की तरह आपको रिवॉर्ड देती हैं, इसलिए मैं केवल फ़ेसबुक के ही बग रिपोर्ट करता हूं."

मज़ेदार बात ये है कि आनंद एक इंजीनियर तो हैं, लेकिन उन्होंने हैकिंग का अलग से कोई कोर्स नहीं किया.

उन्होंने दूसरे हैकरों के रिसर्च और यूट्यूब में मौजूद सामग्री से ही एथिकल हैकिंग सीखी है.

आनंद कहते हैं, "भारत में हैकिंग के जितने भी कोर्स होते हैं उनमें से अधिकतर फर्जी हैं. वो केवल बेसिक चीज़ें बताते हैं और छात्रों से इसके काफी पैसे वसूलते हैं."

उनके अनुसार, "मैं भी शुरुआत में एक कोर्स कर रहा था, लेकिन जब समझ में आया कि मुझे बेवकूफ बनाया जा रहा है तो मैंने वो कोर्स कुछ ही दिनों में छोड़ दिया."

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