कांग्रेस के चुनावी पोस्टर पर कन्हैया-वेमुला

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असम में कांग्रेस के चुनावी पोस्टरों में जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार और हैदराबाद यूनिवर्सिटी के दिवंगत दलित छात्र रोहित वेमुला की तस्वीरें नज़र आ रही हैं.

जबकि दोनों का कांग्रेस से कोई नाता नहीं है.

इनके अलावा पोस्टर में एक किसान को आत्महत्या करते दिखाया गया है, जबकि एक महिला छोटे बच्चे को पकड़कर चीख़-चीख़कर रो रही है.

असमिया भाषा में पोस्टर में बड़े अक्षरों में लिखा है, "क्या यही मोदी के अच्छे दिन है? फ़ैसला आपका."

असम में 4 और 11 अप्रैल को विधानसभा के लिए वोट डाले जाएंगे.

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असम प्रदेश कांग्रेस के नेता रिपुन बोरा ने बीबीसी से कहा, "कांग्रेस ने चुनावी फ़ायदे के लिए यह पोस्टर नहीं लगवाए हैं. पार्टी का मक़सद यहां के आम लोगों और मतदाताओं को इस बात की जानकारी देना है कि बिना किसी अपराध के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने इन लोगों को सताया है. ये मोदी सरकार की तानाशाही है."

वहीं प्रदेश भाजपा के प्रभारी महेंद्र सिंह का कहना है, "कांग्रेस ने जिस तरीक़े से इस पोस्टर को लगाने का काम किया है, पूरा देश देख रहा है. देश के लोग ये देख रहे हैं कि जो राष्ट्रद्रोह के नारे लगाते हैं, कांग्रेस उनके साथ खड़ी है. कांग्रेस जिस क़दर इन पोस्टरों से चुनावी फ़ायदा उठाना चाहती है, असम की जनता उसका जवाब देगी."

लेकिन आम लोगों पर इस पोस्टरों का क्या असर पड़ेगा?

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गुवाहाटी के रिक्शा चालक रफ़ीक़ का कहना है कि वो पोस्टरों को देखकर कभी वोट नहीं देते.

वकील और असम की राजनीति पर समझ रखने वाले हाफ़िज़ रशीद अहमद चौधरी का मानना है कि कन्हैया का मामला अदालत में है और ऐसे में किसी पार्टी को उनका इस्तेमाल राजनीतिक फ़ायदे के लिए नहीं करना चाहिए.

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