वर्ल्ड टी20: भारत से जुड़ी 10 दिलचस्प बातें

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नागपुर में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ भारतीय टीम अपने वर्ल्ड टी-20 अभियान की शुरुआत कर रही है.

भारतीय टीम इस बार पूरी लय में दिख रही है और दूसरी बार ख़िताब जीतने की कोशिश करेगी.

एक नज़र इस टूर्नामेंट में भारत से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातों पर:

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1. पहला वर्ल्ड टी20 2007 में दक्षिण अफ्रीका में खेला गया था. महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में टीम इंडिया ने वर्ल्ड टी20 का खिताब जीता था. ये धोनी की कप्तानी में टीम इंडिया का पहला बड़ा टूर्नामेंट था और यहीं से कैप्टन कूल का कामयाबी का सफ़र शुरू हुआ.

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2. भारत ने एक बेहद रोमांचक फ़ाइनल मुक़ाबले में पाकिस्तान को महज़ 5 रन से हराकर वर्ल्ड टी20 का ख़िताब जीतने का कारनामा कर दिखाया था. पाकिस्तान को आखिरी ओवर में जीत के लिए 13 रन बनाने थे और आखिरी जोड़ी विकेट पर थी. भारतीय कप्तान धोनी ने गेंद जोगिंदर शर्मा को थमाई. पाकिस्तानी कप्तान मिस्बाह उल हक ने दूसरी गेंद पर छक्का लगा दिया. इसके बाद चार गेंद पर टीम को छह रन बनाने थे. लेकिन जोगिंदर शर्मा की गेंद को उठाकर पर मारने की कोशिश में मिस्बाह उल हक चूक गए और श्रीसंत ने शानदार कैच लपक कर टीम को वर्ल्ड चैंपियन का ख़िताब दिला दिया.

3. 2007 में भारतीय क्रिकेट टीम ने करीब 24 साल बाद कोई वर्ल्ड टूर्नामेंट जीतने का करिश्मा दिखाया था. इस खिताबी जीत वाले मुक़ाबले के मैन ऑफ द मैच चुने गए थे इरफ़ान पठान. पठान ने 4 ओवरों की गेंदबाज़ी में 16 रन देकर तीन विकेट चटकाए थे. वैसे इसी मुक़ाबले में इरफ़ान ख़ान के भाई यूसुफ पठान ने टी-20 में डेब्यू किया था.

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4. 2007 के वर्ल्ड कप में भारतीय बल्लेबाज़ युवराज सिंह ने इंग्लैंड के ख़िलाफ़ वो कारनामा कर दिखाया जो टी20 में अब तक दोबारा नहीं हुआ है. उन्होंने इंग्लैंड के तेज गेंदबाज़ स्टुअर्ट ब्रॉड की लगातार छह गेंदों पर छह छक्के ठोक दिए. युवराज ने इस पारी में महज 12 गेंदों पर 50 रन ठोक दिए. ये अब तक टी20 की सबसे तेज़ हॉफ़ सेंचुरी है.

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5. 2007 के ही वर्ल्ड टी20 के दौरान टूर्नामेंट का पहला टाई मुक़ाबला खेला गया और ये मुक़ाबला हुआ था भारत और पाकिस्तान के बीच. इस मैच में पाकिस्तान को जीत के लिए अंतिम 6 गेंद पर 12 रन बनाने थे. एक बार फिर मिस्बाह उल हक के सामने टीम को जीत दिलाने की चुनौती थी, उन्होंने दो चौके भी लगाए. टीम को आखिरी 2 गेंद पर एक रन बनाना था. अंतिम गेंद पर रन लेने की कोशिश में मिस्बाह रन आउट हुए. मैच का नतीजा सुपर ओवर में निकला. बोल्ड आउट वाले सुपर ओवर में भारत ने ये मैच 3-0 से जीता.

6. भारतीय क्रिकेट टीम 2007 की कामयाबी को अगले तीन वर्ल्ड टी20 में दोहरा नहीं सकी. 2009, 2010 और 2012 के वर्ल्ड टी20 में भारतीय टीम सेमीफ़ाइनल तक भी नहीं पहुंच सकी.

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7. 2014 में बांग्लादेश में खेले गए वर्ल्ड टी20 में भारत ने शानदार वापसी करते हुए फ़ाइनल में प्रवेश किया. लेकिन श्रीलंका से उसे हार का सामना करना पड़ा. भारत ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए 20 ओवरों में चार विकेट पर 130 रन बनाया. इसके जवाब में श्रीलंका ने आसानी से 4 विकेट पर 134 रन बनाकर मैच जीत लिया.

8. एमएस धोनी वर्ल्ड टी-20 इतिहास के इकलौते ऐसे खिलाड़ी हैं, जो अब तक अपनी टीम के सभी मैचों में कप्तान रहे हैं. भारत ने अब तक इस टूर्नामेंट में 28 मैच खेले हैं और हर मैच के कप्तान धोनी रहे हैं. इन मैचों में भारत ने 17 मैच जीते हैं, 9 मैच हारे हैं, जबकि एक मैच टाई रहा है.

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9. वर्ल्ड टी20 के दौरान अब तक केवल तीन मौके ऐसे हैं जब किसी टीम को 1 रन से जीत हार का फ़ैसला हुआ है. इसमें एक मुक़ाबला भारत का भी है. भारत ने 2012 में श्रीलंका में खेले गए वर्ल्ड टी20 में दक्षिण अफ्रीका को एक रन से हराया था. भारत की ओर से आखिरी ओवर की गेंदबाज़ी एल बालाजी कर रहे थे, दक्षिण अफ्रीका को 6 गेंद पर 14 रन बनाने थे. पहली गेंद पर एल्बी मोर्कल ने छक्का लगा दिया. लेकिन दूसरी गेंद पर बालाजी ने उन्हें पवेलियन भेज दिया. आख़िरी बल्लेबाज़ के तौर पर एल्बी के भाई मोर्नी आए. आते ही उन्होंने एक और छक्का जड़ दिया. अंतिम दो गेंदों पर दक्षिण अफ्रीका को 2 रन बनाने थे. लेकिन बालाजी ने मोर्कल को आउट कर टीम को जीत दिला दी.

10. 2016 में वर्ल्ड टी20 में हिस्सा लेने वाली भारतीय टीम में चार ऐसे खिलाड़ी हैं जो अब तक हर वर्ल्ड टी20 टूर्नामेंट में हिस्सा ले चुके हैं. ये चार खिलाड़ी हैं- एमएस धोनी, युवराज सिंह, रोहित शर्मा और हरभजन सिंह.

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