'दोषी' छात्र ने कहा- 'हमें नहीं बताया जुर्म'

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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में नौ फरवरी को कथित तौर पर देश-विरोधी नारे लगने की जांच करने वाली उच्चस्तरीय समिति ने अपनी रिपोर्ट यूनिवर्सिटी प्रशासन को सौंप दी है.

रिपोर्ट के आधार पर कुछ छात्रों को दोषी पाया गया है और उन्हें कारण-बताओ नोटिस भेजा गया है.

जेएनयू की प्रवक्ता पूनम कुडेसिया के मुताबिक, "ये पाया गया है कि कुछ छात्रों ने विश्वविद्यालय के नियमों का उल्लंघन किया है, विश्वविद्यालय को इनके ख़िलाफ़ कार्रवाई करने का अधिकार है और उसके तहत चीफ़ प्रोक्टर की ओर से छात्रों को शो-कॉज़ नोटिस जारी किया जाएगा."

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नोटिस पाने वाले छात्रों में से कन्हैया कुमार के अलावा रामा नागा हैं जो जेएनयू छात्र संघ के महासचिव हैं. वो कहते हैं कि नोटिस में उनके जुर्म के बारे में कुछ नहीं बताया गया है.

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा कि, "नोटिस में कहीं भी ये स्पष्ट नहीं है कि हमें किस बात का दोषी पाया गया है, सिर्फ़ जवाब देने की हिदायत दी गई है, साथ ही हमारा पक्ष सुने बग़ैर फ़ैसला सुना दिया गया है."

उच्चस्तरीय समिति ने छात्रों को अपना पक्ष रखने के तीन मौके दिए थे पर कई छात्रों ने समिति में किसी दलित और महिला सदस्य ना होने पर आपत्ति जताते हुए, अपने बयान देने से मना कर दिया था.

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अब शो-कॉज़ नोटिस में छात्रों को जिस धारा के तहत दोषी पाया गया है उसके मुताबिक- "(उन्होंने) ऐसा कोई काम किया है जिसे वाइस चांस्लर या किसी अन्य अधिकारी ने विश्वविद्यालय में बर्ताव और अनुशासन के कायदों का उल्लंघन माना है."

नोटिस के मुताबिक छात्रों को बुधवार शाम छह बजे तक जवाब देना है, अन्यथा ये मान लिया जाएगा कि उन्हें अपने बचाव में कोई सफाई नहीं देनी और उनके ख़िलाफ़ "उचित कार्रवाई" शुरू कर दी जाएगी.

जेएनयू के छात्र संघ ने जांच समिति पर अलोकतांत्रिक होने का आरोप लगाया है और सिफारिशों को बेबुनियाद बताया है.

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जेएनयू के छात्र संघ की उपाध्यक्ष शैला रशीद ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "जांच समिति लोकतांत्रिक नहीं है. हमने पहले भी इसका विरोध किया है, जिसके बाद दो नए सदस्यों को जोड़ा गया. उनके सामने पुराने बयान नए सिरे से दर्ज किया जाना था, जो नहीं लिए गए, इस वजह से हम इन सिफ़ारिशों को नहीं मानते."

जेएनयू शिक्षक संघ भी समिति के ख़िलाफ़ अपनी आवाज़ उठा चुका है.

जेएनयू शिक्षक संघ के महासचिव सुरजीत मजूमदार ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "संघ के मुताबिक ये जांच ठीक तरीके से नहीं हुई है और हमने एसके ख़िलाफ़ नो-कॉन्फ़िडेंस प्रस्ताव भी पारित किया था, और अब भी रिपोर्ट की प्रति ना दोषी छात्रों के पास है ना शिक्षकों के पास."

संसद हमले के दोषी अफ़ज़ल गुरू से जुड़े नौ फरवरी के कार्यक्रम के बाद छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार को गिरफ़्तार किया गया था और अब वो ज़मानत पर बाहर हैं. दे अन्य छात्र उमर ख़ालिद और अनिरबान भट्टाचार्य अब भी हिरासत में हैं.

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