भाजपा विधायक 14 दिन की न्यायिक हिरासत में

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पुलिस घोड़े पर कथित हमले के आरोप में उत्तराखंड के भाजपा विधायक गणेश जोशी को देहरादून की अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है.

इससे पहले देहरादून के पुलिस अधीक्षक (शहर) यशवंत सिंह ने बीबीसी को बताया था कि उन्हें पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है.

आरोप हैं कि विधानसभा के पास पिछले दिनों प्रदर्शन के दौरान भाजपा विधायक गणेश जोशी ने कथित रूप से पुलिस के घोड़े पर डंडे बरसाए. उसके बाद घोड़ा वहां लगे लोहे के बैरीकेड के पास गिरा और उसकी टांग टूट गई.

हालांकि इस बारे में कोई स्पष्ट वीडियो साक्ष्य नहीं है. अलबत्ता एक तस्वीर में घोड़े के सामने विधायक, जोशो-खरोश से लाठी उठाए वार की मुद्रा में नज़र आ रहे हैं.

पंतनगर विश्वविद्यालय के अलावा पुणे से विशेषज्ञ डॉक्टरों के दल ने उसके पांव का ऑपरेशन किया और गैंग्रीन फैलने के डर से घोड़े का पांव काटना पड़ा.

बताया जा रहा है कि शक्तिमान अब पुलिस परेड का हिस्सा नहीं बन पाएगा.

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पुलिस इस मामले में भाजपा के एक अन्य कार्यकर्ता को गिरफ़्तार कर चुकी है.

इस दौरान बीजेपी आलाकमान ने अपने उत्तराखंड प्रभारी श्याम जाजू को 'डैमेज कंट्रोल' के लिए देहरादून भेजा था.

पुलिस महानिरीक्षक (गढ़वाल) संजय गुंज्याल के मुताबिक़ ''एक टीम बनाई गई है. मामले की संवेदनशीलता देखते हुए जांच जारी है. वीडियो और चश्मदीद साक्ष्यों के आधार पर नैनीताल ज़िले में एक व्यक्ति की गिरफ़्तारी की गई है. उसका नाम प्रमोद वोहरा है.''

इससे पहले बीबीसी से बातचीत में भाजपा विधायक गणेश जोशी ने कहा था, ''हम राजनैतिक कार्यकर्ता हैं. जेलों में रहते हैं. हमारे नेता जेल में रहे हैं. हम आंदोलनकारी हैं. हम जेल जाने से घबराने वाले नहीं हैं. उस घोड़े को मल्टीपल फ्रेक्चर हैं. पैर में रॉड डाली गई है. उसे खड़ा किया गया. क्या ज़रूरत थी एकदम खड़ा करने की. उसे चार-पांच दिन पड़ा रहने देते.''

गणेश जोशी गुरुवार को घोड़े को हाल जानने देहरादून की पुलिस लाइन गए थे, जहां उसका इलाज चल रहा है. तब उन्होंने कहा था, ''मैं अपने साथी विधायकगणों के साथ पुलिस लाइन गया. मुझे खेद है कि बेचारे घोड़े को राजनीति का शिकार होना पड़ रहा है. मैं घोड़े के जल्द स्वास्थ्य लाभ की कामना करता हूँ.''

जोशी ने उल्टा कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाया था कि राजनीतिक लाभ के लिए वह घोड़े को मरवाना चाहती है लेकिन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भाजपा के आरोपों को अनर्गल प्रलाप कहकर ख़ारिज कर दिया था.

हरीश रावत ने घोड़े के घायल होने को ड्यूटी के वक़्त सिपाही का घायल होना बताया था.

हरीश रावत के मुताबिक़, ''एक मूक जानवर को मारना एक घृणित काम है. मैंने डीजीपी को बुलाकर कहा है कि इलाज कराएं. ऐसा न लगे कि उत्तराखंड उतना असंवेदनशील हो गया है जितनी भाजपा. भाजपा की संवेदना मर गई है. वे अपना गुण दिखा रहे हैं. बीजेपी ने सहिष्णुता छोड़ दी है.''

शुक्रवार को क्रिकेट खिलाड़ी विराट घोड़े शक्तिमान की पिटाई पर दुख और आश्चर्य जताते हुए दोषियों को कड़ी सज़ा देने की बात कही है.

उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल (@imVkohli) से ट्वीट किया, "सुंदर और निरीह जानवर पर बग़ैर किसी उकसावे के हुए हमले से मुझे ग़ुस्सा आया और झटका लगा है. इससे अधिक कायराना काम कुछ हो नहीं हो सकता."

कोहली ने एक और ट्वीट में लिखा, "उम्मीद है कि तुरंत कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी. हमें शक्तिमान के लिए दुआ करनी चाहिए."

हालांकि अभी यह साफ़ नहीं कि क्या घोड़ा, भीड़ और गहमागहमी से बिदककर नीचे गिरा और वहां पड़े लोहे से चोट खा बैठा या उसे कथित रूप से इतना मारा गया कि उसे अपनी टांग गँवानी पड़ी.

एक सवाल यह भी है कि उग्र प्रदर्शन रोकने के लिए एक सीमित से स्थान में घुड़सवार पुलिस की ड्यूटी लगाना कितना उचित था.

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