उत्तराखंड राष्ट्रपति शासन की ओर?

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उत्तराखंड के बदलते राजनीतिक हालात के बीच सबकी निगाहें राज्यपाल केके पॉल पर टिकी हैं.

हरीश रावत सरकार के भविष्य पर उन्हें ही फ़ैसला करना है.

सदन के भीतर बजट पास कराने के दौरान कांग्रेस के नौ विधायकों ने बग़ावत कर दी थी.

विधानसभा स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल का कहना है कि बजट ध्वनि मत से पारित हो गया. संसदीय कार्य मंत्री इंदिरा हृदयेश और मुख्यमंत्री हरीश रावत भी यही दावा कर रहे हैं.

लेकिन बाग़ी विधायक और भाजपा का कहना है कि बजट पर मतदान कराने की मांग पर कांग्रेस बंट गई और सरकार बजट पास होने से पहले ही अल्पमत में आ गई.

भाजपा नेता इसी दलील के साथ शुक्रवार रात राज्यपाल से मिलने गए थे. उनकी मांग है कि हरीश रावत सरकार को बर्ख़ास्त किया जाना चाहिए क्योंकि उसने सदन का विश्वास खो दिया है.

लेकिन मुख्यमंत्री रावत इस बात पर अड़े हैं कि सरकार को सदन में बहुमत है.

उन्होंने चुनौती दी है कि यदि भाजपा को इस पर ऐतराज़ है तो वह सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आए. वे इसी दलील के साथ शनिवार को राज्यपाल से मिलेंगे.

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इस बीच उत्तराखंड से भारतीय जनता पार्टी के 26 और कांग्रेस के नौ विधायक दिल्ली पहुँच चुके हैं.

उन्हें एक विशेष चार्टर्ड विमान से राजधानी लाया गया है. उन्हें भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मिलवाया जाएगा.

उत्तराखंड विधानसभा में कुल 70 सदस्य हैं. सत्ताधारी कांग्रेस के पास 36 विधायक हैं. इसे तीन निर्दलियों, बहुजन समाज पार्टी के दो और उत्तराखंड क्रांति दल के एक विधायक का समर्थन भी हासिल है.

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यदि भाजपा के दावों पर यक़ीन करें तो कांग्रेस के नौ विधायकों के टूटने के बाद सत्ताधारी दल के पास सिर्फ 27 विधायक बचते हैं.

दूसरी ओर, यदि कांग्रेस के बाग़ी विधायक भाजपा का साथ दें, तो भाजपा के पास कुल 35 विधायकों का समर्थन होगा.

भाजपा विधायक गणेश जोशी न्यायिक हिरासत में हैं और भीमलाल आर्य को मुअत्तल कर दिया गया है.

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