महबूबा होंगी कश्मीर की पहली महिला मुख्यमंत्री

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जम्मू कश्मीर विधानसभा के 30 विधायकों की बैठक के बाद सरकार बनाने को लेकर भारत प्रशासित कश्मीर में पिछले 10 हफ़्तों से चल रहा गतिरोध ख़त्म होने की उम्मीद है.

पिछले दिनों मुख्यमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद की मौत के बाद राज्य में राज्यपाल शासन लगा दिया गया था.

सईद की बेटी और उनकी राजनीतिक उत्तराधिकारी महबूबा मुफ़्ती ने आख़िरकार लंबे इंतज़ार के बाद पदभार संभालने का फ़ैसला किया है. ऐसे में महबूबा मुफ़्ती जम्मू कश्मीर की पहली महिला मुख्यमंत्री होंगी.

मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात के बाद उन्होंने कहा था, ''मैं संतुष्ट हूं. अब मैं श्रीनगर में अपने साथियों से इस बारे में बात करूंगी.''

इससे साफ़ हो गया था कि वह भाजपा के साथ गठबंधन जारी रखने का मन बना चुकी हैं.

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गुरुवार दोपहर को उनके आधिकारिक निवास पर हुई निर्णायक बैठक में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के 30 विधायकों ने महबूबा को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया.

पीडीपी ने पिछले साल भाजपा के साथ गठबंधन किया था जिसे पहली बार भारत प्रशासित कश्मीर के हिंदू बहुल इलाक़ों में दो दर्जन से ज़्यादा सीटें मिली थीं.

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यदि सबकुछ ठीकठाक चला तो भाजपा के सहयोग से बन रही जम्मू कश्मीर सरकार में 56 वर्षीय महबूबा मुफ्ती पहली महिला मुख्यमंत्री होंगी.

उनके पिता ने इस सत्ता गठबंधन को 'उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव के बीच गठबंधन' क़रार दिया था.

मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की दिल्ली के अस्पताल में 7 जनवरी को मौत हो गई थी.

महबूबा भाजपा के साथ गठबंधन जारी रखने के फ़ैसले को टालती रहीं और प्रधानमंत्री से कुछ मांगों को लेकर ठोस आश्वासन चाहती थीं.

इनमें अलगाववादियों से बातचीत, सख़्त सैन्य क़ानून की वापसी, पावर प्रोजेक्ट्स की वापसी और बाढ़ पीड़ितों का पुनर्वास शामिल थे.

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी में महबूबा के सूत्रों ने कहा, ''डील हो चुकी है और अब महबूबा का पदभार संभालना कुछ दिनों की बात है.''

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विपक्षी नेशनल कॉन्फ्रेंस और कई नागरिक समूहों ने महबूबा की पार्टी पर मुख्य राजनीतिक धारा में ''मुस्लिम विरोधी'' ताक़तों को शामिल करने के आरोप लगाए हैं.

एक कॉलम्निस्ट एजाज़ अहमद कहते हैं, "अगर महबूबा को भाजपा के साथ ही जाना था तो उन्होंने ढाई महीने तक यह ड्रामा क्यों किया."

राज्य में पिछले 10 महीनों से राज्यपाल शासन है. इस दौरान राज्यपाल ने कई सुधारों की घोषणा की जिनकी प्रशंसा भी हुई.

एक ब्लॉगर समीर लिखते हैं, "पीडीपी और भाजपा जो दस महीनों में नहीं कर सकते वह राज्यपाल ने दस हफ़्तों में कर दिया."

उन्होंने बाढ़ पीड़ितों में 800 करोड़ की राहत बांटने का उदाहरण दिया. साथ ही कुछ सार्वजनिक स्थानों से सेना को हटाने और दूसरे कई क़दमों का ज़िक्र किया है.

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