कई दवाओं पर लटकी है तलवार

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भारत में कई दवाओं पर पाबंदी लग गई है. इनमें से कुछ ऐसी हैं जो सिरदर्द, ज़ुकाम, बुख़ार के लिए लोग खुद ही केमिस्ट से ले आते हैं. वहीं इनमें ऐसी दवाएं भी हैं जिन्हें आप शुगर, डिप्रेशन या एंटीबॉयोटिक के तौर पर डॉक्टर की सलाह पर ख़रीदते हैं.

दरअसल भारत सरकार ने 300 से ज़्यादा ‘फ़िक्स्ड डोज़ कॉम्बिनेशन्स’ पर पाबंदी लगाई है जिसकी वजह से कई दवाएं बेचना अब ग़ैरक़ानूनी हो गया है. दो या उससे ज़्यादा दवाओं को मिलाकर बनाई गई दवा को ‘एफ़डीसी’ यानि ‘फ़िक्स्ड डोज़ कॉम्बिनेशन ड्रग’ कहा जाता है.

सरकार के आदेश के मुताबिक, “कई एफ़डीसी में दवाओं के मिश्रण का वैज्ञानिक आधार नहीं है और दवा कंपनियों के जवाबों को दोबारा परखने के बाद भी सार्वजनिक हित में सरकार के पास इन पर पाबंदी लगाने के अलावा कोई चारा नहीं है.”

इस फ़ैसले के विरोध में दवा कंपनियां दिल्ली हाई कोर्ट गई हैं. फ़िलहाल कोर्ट ने कुछ दिनों के लिए सरकार के इस फ़ैसले पर रोक लगा दी है.

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पाबंदी वाली कुछ दवाएं

  • सूमो, निसिप प्लस – बुख़ार और दर्द
  • बेनाड्रिल सिरप, ऐलेक्स सिरप, कोरेक्स सिरप – ख़ांसी
  • डी कोल्ड टोटल, विक्स ऐक्शन 500 – सर्दी, ज़ुख़ाम, ख़ांसी
  • चेस्ट ऑन, सी2 कोल्ड, प्लैनोकफ़ डी, ओकासेट कोल्ड – ज़ुख़ाम
  • ट्राइग्युलिन, ग्लूकोनॉर्म पी, ऐम्रिल पी1 और एमपी1, – शुगर
  • पायोप्लस2, ग्लाइमेस्टर पी, ग्लाइमाडे पी1 और पी2 – शुगर

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पाबंदी वाली कुछ अन्य दवाएं

  • बैसिजिल एन सिरप – दस्त (ऐंटीबायोटिक)
  • ओर्नोफ़ टेबलेट ओर सिरप – यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फ़ेक्शन (ऐंटीबायोटिक)
  • नॉरमेट्रोजिल – यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फ़ेक्शन (ऐंटीबायोटिक)
  • मेट्रोजिल पी ऑएंटमेंट – चोट, घाव के लिए
  • नोवाक्लॉक्स एलबी – बैक्टीरियल इनफ़ेक्शन
  • डेप्सॉल फ़ोर्ट - अवसाद
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सरकार के इस फ़ैसले पर 'इंडियन ड्रग मैनुफ़ैक्चरर्स एसोसिएशन' के अध्यक्ष एस.वी.वीरामणी कहते हैं, “सरकार ने ये पांबदी मनमाने तरीके से लगाई है.”

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, “एफ़डीसी दवाओं के बुरे प्रभाव नहीं होते, बल्कि ये मरीज़ की सहूलियत के लिए है कि उन्हें एक ही दवा में कई इलाज मिल जाएं, विदेश में भी ऐसी दवाओं को बेचा जाता है.”

दूसरी ओर, ‘डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ की प्रादेशिक संयोजक लीना मेंघाने कहती हैं, “दवाओं को मिलाकर बनाए जाने वाली एफ़डीसी से मरीज़ों के शरीर में ऐसे बदलाव आने की संभावना होती है जिससे उन पर ये दवाएं असर करना ही बंद कर दें, इसलिए ये पाबंदी ज़रूरी है.”

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