'ग़लती से मंदिर के निमंत्रण पत्र पर मुसलमान का नाम'

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कर्नाटक के तटीय शहर पुत्तुर के मंदिर की रथयात्रा के निमंत्रण पत्र पर मुस्लिम अधिकारी का नाम छपने के बाद विवाद शुरू हो गया.

मुस्लिम नाम छपने से नाराज कुछ भक्तों ने इसके खिलाफ़ उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर दी.

कनार्टक सरकार ने उच्च न्यायालय के सामने स्वीकार किया कि पुत्तुर के मंदिर में अगले महीने होने वाली रथ यात्रा के लिए जो निमंत्रण पत्र बांटे गए, उस पर 'गलती से' ग़ैर-हिंदू समुदाय के उपायुक्त का नाम छप गया.

दरअसल कर्नाटक के हिंदू रिलेजियस इंस्टीट्यूशंस एंड चैरिटेबल एनडाउमेंट ऐक्ट 1997 की धारा 7 के अनुसार मुरजई मंदिर के निमंत्रण पत्र पर किसी गैर-हिंदू शख्स का नाम नहीं हो सकता. इस कानून के अनुसार तो जिसकी हिंदू धर्म में आस्था नहीं है, उस व्यक्ति का नाम भी निमंत्रण पत्र पर नहीं छापा जा सकता.

भगवान महालिंगेश्वर मंदिर के कार्यकारी अधिकारी और प्रबंधक ने 11 अप्रैल से 20 अप्रैल के बीच होने वाली रथ यात्रा के लिए निमंत्रण पत्र बांटें. इस पर उपायुक्त एबी इब्राहिम का नाम छपा हुआ था.

स्थानीय विश्व हिंदू परिषद ने हिंदू एनडोमेंट ऐक्ट का हवाला देते हुए इस पर गहरी आपत्ति जताई.

मुख्य न्यायाधीश सुभ्रो कमल मुखर्जी की अध्यक्षता में गठित खंडपीठ ने सरकार की 'गलती' मानने की बात को दर्ज किया.

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लेकिन साथ ही उन्होंने इस पूरे मामले को 'मूर्खतापूर्ण' बताया है.

न्यायमूर्ति मुखर्जी के अनुसार उनके अपने गृहराज्य पश्चिम बंगाल में मुसलमान दुर्गा पूजा महोत्सव में शामिल होते हैं और अहम भूमिका निभाते रहे हैं.

जब याचिकाकर्ताओं ने निमंत्रण पत्र को वापस लिए जाने पर जोर दिया तो न्यायालय ने इसे अव्यवहारिक बताया. न्यायालय ने सरकार को कुछ वैसे निमंत्रण पत्र छापने को कहा जिन पर उपायुक्त इब्राहिम का नाम न हो.

दिलचस्प है कि इसके पहले भी उपायुक्त इब्राहिम का नाम बेंगलुरू ग्रामीण, हसन, मैसुरू और मंगलुरू जिले के कई मंदिरों के निमंत्रण पत्र पर छप चुका है.

वास्तव में मुरजई विभाग की ओर से ही प्रबंधित एक और मशहूर धार्मिक मंदिर कुक्की सुब्रह्मण्यम मंदिर के लिए भी हाल ही में इसी तरह का निमंत्रण पत्र छापा था.

ये मामला इसलिए भी महत्व रखता है क्योंकि दक्षिण कन्नड़ के तटीय जिले मीडिया में हिंदूत्व की प्रयोगशाला के रूप में मशहूर रहे हैं. यहां हिंदू धर्म या अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले लड़के लड़कियों के एक साथ घूमने पर हमले हुए हैं.

हालांकि सरकार का कहना है कि ये बस प्रोटोकॉल निभाने का मामला था क्योंकि किसी भी सरकारी कार्यक्रम के निमंत्रण पत्र पर उपायुक्त का नाम होना चाहिए.

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लेकिन इस विवाद के बाद कुछ ऐसे मसले भी उठ रहे हैं जिन्हें वरिष्ठ अधिकारी अनदेखा नहीं कर सकते.

अदालत के आदेश में कहा गया है कि इब्राहिम उत्सव के दौरान मौजूद ना रहें. किसी भी जिले में उपायुक्त या कलेक्टर जिला मजिस्ट्रेट की भूमिका में भी होता है जिस पर कानून व्यवस्था को बनाए रखने की जिम्मेदारी होती है.

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने, नाम गुप्त रखे जाने की शर्त पर बीबीसी से कहा, ''इस आदेश का निहितार्थ ये है कि कानून-व्यवस्था को संभालने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति ख़ुद ही आयोजन स्थल पर ना रहे. हमें किसी भी तरह के सुधार की शुरुआत करने से पहले इस पहलू पर विचार करने की जरूरत है.’’

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