कैसा रहे जिस्म, कब किस तरह का ट्रेंड

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चीन के सोशल मीडिया पर चल रहे एक मौजूदा ट्रेंड ने सुंदरता के मानकों को लेकर नई बहस छेड़ दी है.

इसकी शुरुआत हुई इंटरनेट पर चल रहे एक ट्रेंड से. इंटरनेट के यूज़र्स ऑनलाइन पर अपनी तस्वीरें लगाते थे, जिनमें लोग हाथ में 'ए-फोर' साइज़ के काग़ज़ से अपनी कमर ढके रहते थे.

चीन के सरकारी अख़बार 'पीपल्स डेली' ने इसे फ़िटनेस क़रार दिया. पर दूसरे कई लोगों ने कहा कि 21 सेंटीमीटर की कमर सेहत के लिए बुरी है और व्यावहारिक नहीं है.

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Image caption कमर के पीछे से नाभि छूने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर हुईं वायरल

ऐसा पहली बार नहीं हुआ कि ख़तरनाक ट्रेंड लोगों की कल्पना पर छा गया हो. स्वास्थ्य से जुड़े छह ट्रेंड पहले भी रहे हैं जो निहायत ही ख़तरनाक थे.

इसके पहले चीन के सोशल मीडिया पर हज़ारों लोगों ने अपनी तस्वीरें अपलोड की जिसमें लोग अपनी पीठ से कमर की ओर हाथ डाल कर नाभि को दबाते थे.

माइक्रोब़्लॉगिंग साइट वीबो पर यह ट्रेंड काफ़ी चला. साल 2015 के जून तक लोगों ने 13 करोड़ बार इसे लाइक किया.

इसके अलावा 104,000 लोगों ने इससे जुड़ी बहस में हिस्सा लिया. कुछ लोगों का कहना है कि इस तरह के ट्रेंड ग़लत हैं और सेहत के लिए ठीक नहीं हैं.

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Image caption ग़लत तरीके से सोने का क्रेज़

इसके पहले चीन में इंटरनेट पर ऐसे सेल्फ़ीज़ लगाए गए, जिनमें कॉलर बोन पर सिक्के रख कर संतुलन बनाया गया था.

इसी तरह 1990 में इसका चलन था कि लोग अपना वजन कम करने के लिए टेप वर्म खाते थे.

लोग दवा की शक्ल में बीफ़ में पड़े टेप वर्म खाते थे. यह माना जाता था कि टेप वर्म जब समय के साथ बड़ा हो जाएगा तो पूरे खाने को सोख लेगा.

इससे वजन तो कम होता था, पर उल्टी-दस्त भी होती थी.

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Image caption टेप वर्म खा कर वजन कम करने की सनक

यह कई तरह से जोखिम भरा था. टेप वर्म बढ़ कर नौ मीटर तक लंबा हो सकता है. पर यह कई तरह की बीमारियों का कारण भी बन सकता है.

इस टेप वर्म से लोगों को सिरदर्द, आंखों का रोग, आधे सर में दर्द, मिर्गी और याददाश्त खोने का रोग हो सकता है.

काफ़ी पतले शरीर की चाहत कोई नई बात नहीं है. उन्नीसवीं सदी में वैस्प वेस्ट कोर्सेट काफ़ी लोकप्रिय था.

फ़ैशन के प्रति जागरूक महिलाएं अपने शरीर को शीशे के बने आवरग्लास की तरह दिखाने की कोशिश करती थीं.

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Image caption महिलाओं में कोर्सेट भी काफ़ी लोकप्रिय हुआ था

पर इससे आंतरिक अंगों, पसलियों और कमर के हिस्सों के चोटिल होने की आशंका बनी रहती थी.

औद्योगिक क्रांति और बड़े पैमाने पर उत्पादन की प्रक्रिया की वजह से रबर का इस्तेमाल तेज़ी से बढ़ा. इसमें रबर के निकर और कोर्सेट भी शामिल हैं.

लोग रबर के कोर्सेट पहनेंगे तो पसीना निकलेगा और इससे वजन कम हो जाएगा, यह धारणा आम थी.

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Image caption रबर अंडरवियर पहन कर भी वजन कम करने की कोशिशें की गईं

यह कोई मज़े की बात नहीं है कि चमड़ा छिलने वाले पतले रबर के कपड़े पहने जाएं. पसीने से इनफ़ेक्शन की आशंका बनी रहे.

लॉर्ड बायरन पहली शख़्सियत थे, जिन्होंने वज़न कम करने की सनक आम जनता में शुरू की थी.

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Image caption अंग्रेज़ी कवि लॉर्ड बायरन वजन कम करने के लिए सिरका पीते थे

आज के सेलेब्रिटी की तरह बायरन भी फ़िगर को लेकर काफ़ी चौकन्ना रहते थे. उन्होंने 1800 के आस पास ऐसा खाना लोकप्रिय किया, जिसमें सिरके का प्रमुखता से इस्तेमाल होता था.

बायरन अपने शरीर की साफ़ सफ़ाई के लिए सिरका पीया करते थे और सिरके में डूबा आलू खाया करते थे. इसके साइड इफ़ेक्ट यह था कि उल्टी-दस्त होती थी.

लॉर्ड बायरन का वजन 1806 में 88 किलोग्राम था, जो 1811 में घट कर 57 किलो हो गया.

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