'देशभक्ति, बीफ़ के दौर में भ्रष्टाचार की किसे परवाह'

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दुनिया में सबसे अधिक गोपनीयता से काम करने वाली पनामा की कंपनी मोसाक फोंसेका के लाखों कागज़ात लीक हो गए हैं और इनमें भारत के भी कई नामी-गिरामी लोगों के नाम हैं जिन्होंने कथित तौर पर टैक्स बचाने या फिर अपना पैसा छिपाने के लिए इस कंपनी का सहारा लिया.

लेकिन भारत में इस पर प्रतिक्रिया लगभग ना के बराबर है. फ़ेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी लोग टिप्पणी करने से बच रहे हैं.

हालाँकि बॉलीवुड के सुपरस्टार रहे अमिताभ बच्चन ने भारतीय टीवी चैनल एनडीटीवी को कहा, "ये हो सकता है कि मेरा नाम का ग़लत इस्तेमाल हुआ हो. मैंने अपने सभी टैक्स दिए हैं और इनमें विदेशों में किया गया ख़र्च भी शामिल है. मीडिया ने जिन कंपनियों का नाम लिया है मैं उनके बारे में नहीं जानता हूँ. मैं इन कंपनियों में कभी निदेशक नहीं रहा हूँ."

बीबीसी हिंदी के फ़ेसबुक और ट्विटर पेज पर हमने पाठकों से ये जानना चाहा कि सोशल मीडिया पर पनामा पेपर्स की ख़ास चर्चा क्यों नहीं है. इस पर बीबीसी हिंदी को बड़ी संख्या में जवाब मिले हैं.

मनोज सुमन नाम के पाठक लिखते हैं, "ये मामला हिंदू मुस्लिम जैसा दिलचस्प नहीं है और सोशल मीडिया पर तो कट्टरपंथियों का ही दबदबा है, उन्हें भ्रष्टाचार से क्या मतलब! ओह, भारत माता की जय. ये बोलना भी ज़रूरी है, क्योंकि कहीं देशद्रोही ना करार दिया जाऊं."

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क्रांति जोशी ने लिखा, "कटु, तीक्ष्ण, गालियों से भरी प्रतिक्रिया उन विषयों पर मिलती हैं जिनसे घृणा या उन्माद पैदा होता है. प्रतिक्रिया इस बारे में भी है पर इस पर प्रतिक्रिया देने वाले लोग उन्मादी प्रवृत्ति के नहीं हैं. दूसरा प्रमुख कारण, इस विषय को समझना बहुत आसान नहीं है."

अनिल लिखते हैं, "पूरा देश कहीं देशभक्ति, तो कहीं मंदिर, कहीं बीफ जैसे मुद्दों में उलझा हुआ है. अभी फुरसत नहीं है भाई लोगों को इस अनामा-पनामा के लिए."

जग्गा जाट ने लिखा, "पनामा मामला है क्या. किसने कितने पैसे खाए या बचाए. कैसे इसमें टैक्स की चोरी हुई, ये मामला अभी तफ़सील से मालूम नहीं. ऐसे में लोग कैसे प्रतिक्रिया दे सकते हैं."

कृति कुमार लिखते हैं, "ये कोई मुद्दा ही नहीं. अब मुद्दे बदल गए हैं. अब तो नारे लगाएं या नहीं, ये ही मुद्दा है. रोज़गार, ग़रीबी, किसान ये अब मत पूछना."

मोहम्मद शाहिद ने लिखा, "भ्रष्टाचार अब भारत में कोई मुद्दा ही नहीं. सबको बस किसी ना किसी तरीक़े से काम निकालना है. अब ईमानदार वही है जिसे बेईमानी का मौक़ा ना मिला हो. ऐसे में अब भ्रष्टाचार का मुद्दा आम भारतीय को झकझोरता ही नहीं है."

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