'छात्र ख़ुद को फ़लस्तीनी समझने लगे हैं'

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भारत प्रशासित कश्मीर के श्रीनगर में मौजूद एनआईटी में कश्मीरी और ग़ैरकश्मीरी छात्रों की झड़प के बाद इस मसले को वहां के अंग्रेज़ी और उर्दू के अख़बारों ने प्रमुखता से छापा है.

ग्रेटर कश्मीर ने अपनी ख़बर में दक्षिणपंथी हिंदुत्व ताकतों के इस मसले को अपने पक्ष में भुनाने की बात कही है.

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राइज़िंग कश्मीर ने छात्रों के हवाले से ख़बर छापी है. यह छात्र इस मसले को स्थानीय और बाहरी छात्रों के बीच संघर्ष के तौर पर पेश करने पर आपत्ति दर्ज करा रहे हैं.

कश्मीर रीडर अख़बार ने अपने संपादकीय में इन कश्मीरी छात्रों की तुलना फ़लस्तीनियों से की है.

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अख़बार के अनुसार राष्ट्रीय स्तर का शैक्षिक संस्थान होने के बावजूद एनआईटी में केवल 20 फ़ीसदी छात्र ही जम्मू कश्मीर से आते हैं.

कश्मीर रीडर अख़बार ने आरोप लगाया है- 'कश्मीर में राष्ट्रीय स्तर के संस्थान फ़ासीवाद को आयात करने वाले ट्रोज़न हॉर्स बनते जा रहे हैं और राज्य के शिक्षा मंत्री को इस मसले पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए. वे इसे प्रशासानिक मसला बताकर टाल नहीं सकते.'

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