'यह त्रासदी है या सामूहिक हत्या?'

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केरल के कोल्लम ज़िले के पारावुर स्थित पुत्तिंगल मंदिर में आतिशबाज़ी की होड़ मेें जो हादसा हुआ, उसके बाद देशभर में भय और दहशत का माहौल है.

केरल के स्थानीय न्यूज़ चैनलों में इसे राज्य की अब तक की 'सबसे बड़ी त्रासदी' बताया गया है. चैनल ने ख़बर को प्रमुखता देने के लिए इसे लाल और काली पट्टी में लिखा.

स्थानीय मलयालम दैनिक 'दीपिका' ने लिखा, "पारावुर में गंभीर हादसा. पटाखा घर कसाईघर में तब्दील हो गया."

मातृभूमि अख़बार ने शीर्षक दिया, "पारावुर आपदा क्षेत्र बन गया."

टेलीविज़न चैनलों पर टूटी हुई इमारत और चल रहे बचाव अभियान की पल-पल की ख़बर दिखाई जा रही है.

तस्वीरों से ज़ाहिर है कि मंदिर का कार्यालय पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है और नज़दीक के घरों को भी नुक़सान हुआ है.

स्थानीय मीडिया ने मरने वालों की संख्या के और बढ़ने की आशंका जताई है. उनका यह भी मानना है कि दुर्घटना इतनी गंभीर है कि मृतकों की निशानदेही भी मुश्किल होगी.

अलग-अलग न्यूज़ चैनल और वेबसाइट दर्शकों और पाठकों से आगे आकर रक्तदान करने की गुज़ारिश कर रहे हैं.

केरल में ट्विटर, फ़ेसबुक और व्हाट्सऐप पर भी रक्तदान की अपील की जा रही है.

स्थानीय ज़िलाधिकारी ने शुरुआत में मंदिर में आतिशबाज़ी की अनुमति नहीं दी थी. इससे जुड़े दस्तावेज़ सामने आने के बाद हादसे के कारणों पर बहस छिड़ गई है.

अटकलें लगाई जा रही हैं कि आतिशबाज़ी का कार्यक्रम आगे बढ़ाने के पीछे कोई राजनीतिक दबाव तो नहीं था, और क्या यदि नियमों का पालन किया जाता तो इस त्रासदी को टाला जा सकता था.

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केरल के अलावा देश के बाक़ी हिस्सों में मंदिर के भीतर सेहत और सुरक्षा से जुड़े नियमों के उल्लंघन की कड़ी आलोचना हो रही है.

हिंदी न्यूज़ चैनल 'ज़ी न्यूज़' पर सुर्ख़ियों में लिखा गया, "लापरवाही ने की सामूहिक हत्या", "श्रद्धालुओं का हत्यारा कौन है?" और "हम अपनी पिछली ग़लतियों से कब सीखेंगे?"

हिंदी चैनल आईबीएन7 का कहना था, "इस मातम के लिए दोषी कौन?", जबकि अंग्रेज़ी चैनल सीएनएन-आईबीएन का स्लग पूछता है, "यह त्रासदी है या सामूहिक हत्या?", "क्या पड़ताल के बाद लोगों की आंख खुलेंगी?" और "क्या कोई जवाबदेही तय की जाएगी?"

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मंदिर हादसे में कम से कम 108 लोगों की मौत हो गई है जबकि 200 से ज़्यादा घायल हुए हैं.

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