गाय बदल सकती है भारत-पाक रिश्ते

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गाय को भारत में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है. मगर वही गाय हिंदू बहुल भारत और मुस्लिम बहुल पाकिस्तान को एकजुट कर रही है.

संक्षेप में कहें तो साहीवाल नस्ल की गाय दोनों देशों को जोड़ रही है. यह गाय ज़्यादातर पाकिस्तानी पंजाब में मिलती है और भारतीय पंजाब में विलुप्त होने के कगार पर है.

क़ानूनी अड़चनें दोनों देशों को इस मुद्दे पर सहयोग नहीं करने दे रही हैं. नतीजा यह कि औषधीय गुणों वाला दूध देने वाली साहीवाल गाय अब भारत में कुछ हज़ार बची हैं तो पाकिस्तान में लाखों में हैं.

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पाकिस्तानी पंजाब में साहीवाल कैटल ब्रीडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राणा अफ़ज़ल ने पाकिस्तान से बीबीसी को फ़ोन पर बताया, ''मैंने मुक्तसर में राष्ट्रीय पशु मेले में शामिल होने के लिए वीज़ा मांगा था पर मुझे इनकार कर दिया गया.''

अफ़ज़ल के पास 100 गायें हैं और हर गाय 303 दिनों में कम से कम 2700 लीटर दूध देती है. पाकिस्तान सरकार उनकी गायों को नस्ल सुधारने के लिए लेती है.

राणा अफ़ज़ल नूरमहल के गाय प्रजनन केंद्र में अक्सर जाते रहते हैं जहां अकेले साहीवाल नस्ल की ही 500 गाय हैं. यह देश में दुर्लभ प्रजातियों की गाय मसलन साहीवाल, गीर और थरपारकर के संरक्षण का सबसे अच्छा फ़ार्म है.

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दिव्य ज्योति जागरण संस्थान के स्वामी चिन्मयानंद भी राणा अफ़ज़ल से सहमत हैं.

वह कहते हैं, ''पशु व्यापार और जर्म प्लाज़्म के लेनदेन पर रोक के कारण भारत को पड़ोसी देश के जीन पूल से फ़ायदा नहीं मिल पा रहा है.''

विभाजन से पहले पंजाब में साहीवाल गायों की बहुतायत थी जो ए2 दूध देती थीं और इस दूध में मोटापा घटाने, शुगर, कैंसर और कॉलेस्ट्रॉल से निपटने के गुण थे. उन्होंने बताया कि जो ए1 गाय आयात की जाती हैं, वो कई बीमारियों की वजह हैं.

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नूरमहल फ़ार्म साहीवाल के दूध को 80 रुपए लीटर के हिसाब से बेचता है क्योंकि ए2 दूध पंजाबियों के एक हिस्से में काफ़ी लोकप्रिय होता जा रहा है.

राणा अफ़ज़ल गाय के दूध की क़ीमतों के मामले में उतने सौभाग्यशाली नहीं हैं. पाकिस्तान में गाय का दूध भैंस के दूध के मुक़ाबले सस्ता मिलता था क्योंकि भैंस के दूध में काफ़ी वसा होती है. अफ़ज़ल ने कहा कि पाकिस्तान में बहुतों को ए2 दूध की अहमियत का पता नहीं है.

स्वामी चिन्मयानंद की गायों ने अब 25 लीटर दूध रोज़ देना शुरू किया है. वह कहते हैं पाकिस्तान जर्म प्लाज़्म की खान है. उसके पास साहीवाल और रेड सिंधी जैसी दो सबसे उम्दा गायें हैं.

स्वामी चिन्मयानंद कहते हैं कि साहीवाल गायों की ख़रीदफ़रोख़्त से दोनों देशों को फ़ायदा हो सकता है.

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ए2 दूध की अहमियत अब पंजाब में महसूस होने लगी है और राज्य सरकार इस पर सब्सिडी देकर इसे प्रोत्साहित करने पर विचार कर रही है.

पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने ख़ुद पाकिस्तान में राणा अफ़ज़ल के फ़ार्म से कई साहीवाल गायें हासिल की हैं.

स्वामी चिन्मयानंद ने कहा कि साहीवाल गाय के प्रजनन को लेकर भारत और पाकिस्तान में 60 साल का फ़र्क है लेकिन नूरमहल फ़ार्म ने इसे सिर्फ़ चार साल में पाट दिया है.

इस मामले में पाकिस्तान के सहयोग से भारत में अच्छे नस्ल की गायों की तादाद बढ़ेगी. वह कहते हैं कि इससे पंजाब की अर्थव्यवस्था में सुधार होगा.

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