नुक़सान किसका है, भोगले का या क्रिकेट का

harsha bhogle

बात 2008 की है. बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच टेस्ट क्रिकेट मैच चल रहा था.

प्रेस बॉक्स में इतिहासकार और क्रिकेट समीक्षक रामचंद्र गुहा भी थे. उनके बगल में मौज़ूद कॉमेंट्री बॉक्स में माइक हर्षा भोगले के हाथ में था. लेकिन उनकी निगाहें प्रेस बॉक्स पर बार-बार जा रही थीं.

लंच के समय मैंने हिमाकत कर ही डाली, "हर्षा, मैं नितिन हूँ बीबीसी से. क्रिकेट रिपोर्टर तो नहीं हूँ लेकिन मौका मिलने पर कवर भी करता हूँ. आप गुहा साहब की तरफ थोड़ी बेचैनी से बार-बार मुड़कर क्यों देख रहे थे?".

हर्षा ने कंधे पर हाथ रखा और ठहाका लगाते हुए बोले, "जब ख़बर ये आ रही हो कि ये सिरीज़ गांगुली और कुंबले की आख़िरी होगी तो किसे इस पर होने वाली प्रतिक्रियाओं को बटोरने की जल्दी नहीं रहेगी."

ऐसी ख़बरें हैं कि हर्षा भोगले को बीसीसीआई ने आईपीएल के कमेंट्री पैनल से हटा दिया है.

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उन दिनों क़रीब छह फ़ुट लंबे हर्षा भोगले अपने बालों को लेकर ज़्यादा ही सचेत रहते थे. उनके बाल तेज़ी से झड़ रहे थे.

लेकिन जितनी तेज़ी से बाल झड़ रहे थे, उससे कहीं ज़्यादा तेज़ी से भोगले बतौर क्रिकेट कमेंटेटर लोकप्रियता के पायदान चढ़ रहे थे.

साल 2011 के वनडे विश्व कप में मोहाली में भारत-पकिस्तान के बीच सेमीफ़ाइनल मैच था.

इस मैच की कमेंट्री कर रहे हर्षा के सिर पर अब घने बाल दिख रहे थे. हेयर-वीविंग के चलते और आत्मविश्वास भी छलक रहा था.

मैच के एक दिन पहले सचिन, सहवाग और युवी नेट्स पर थे. मैंने पास खड़े हर्षा से पूछा, "आपको क्या लग रहा है.''

जवाब मिलता है, "नेट्स पर इनके बल्ले से शॉट लगने पर टाइमिंग की आवाज़ सुन रहे हो न. उधर जाकर ज़रा पाकिस्तान टीम के नेट्स पर भी इस आवाज़ को सुनने की कोशिश करो. जवाब मिल जाएगा.''

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क्रिकेट की इतनी बारीक समझ, पकड़ और खेल की ग़ज़ब याददाश्त अगर गावस्कर, इमरान ख़ान, द्रविड़ या गांगुली की हो तो हैरानी की बात नहीं.

लेकिन जिस शख्स ने क्रिकेट को सिर्फ़ पढ़-देख-सुन कर इन सूरमाओं का मुक़ाबला किया हो तो कुछ तो ख़ास होगा ही.

फ़रवरी 2015 की एक शाम सिडनी क्रिकेट ग्राउंड में भोगले और पूर्व ऑस्ट्रेलियन क्रिकेटर मैथ्यू हेडन चाय पी रहे थे.

मैं कई दिनों से निजी तौर पर हर्षा से पूछना चाह रहा था कि अब तक का सबसे अच्छा पल कौन सा रहा है.

उम्मीद इन जवाबों की थी, सचिन के संन्यास वाले टेस्ट में अंजलि का पहला और बेबाक इंटरव्यू, लॉर्ड्स में पहली बार कमेंट्री, 2003 विश्व कप में मेरी कमेंट्री के दौरान सचिन का शोएब की गेंद पर कवर पर जड़ा छक्का, मुल्तान में सहवाग की ट्रिपल सेंचुरी वगैरह-वगैरह.

लेकिन हर्षा का जवाब ज़्यादा ही सरल था, "जब स्कूली बच्चे मुझसे कहते हैं कि मैं क्रिकेट खेलना नहीं चाहता बल्कि आपकी तरह क्रिकेट कॉमेंटेटर बनने का सपना देखता हूँ.''

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साल 1980 के दशक में खुद हर्षा ने भी सपने में नहीं सोचा होगा कि 1992 में ऑस्ट्रेलिया में उन्हें 'सबसे सेक्सी रेडियो कॉमेंटेटर' कहकर बुलाया जाएगा.

दूसरों के हैरान होने की वजह भी जायज़ थी. मराठी ब्राह्मण और पेशे से प्रोफ़ेसर माता-पिता के 'पढ़ाकू' बेटे हर्षा हैदराबाद में स्कूल भी गए और वहीं से केमिकल इंजीनियरिंग भी की.

फिर आईआईएम अहमदाबाद जैसी प्रतिष्ठित जगह से एमबीए किया. वहीं की छात्रा अनीता से शादी के बाद कुछ साल तक कॉरपोरेट जगत में काम भी किया.

लेकिन क्रिकेट और कमेंट्री का चस्का उनके कॉर्पोरेट करियर पर भारी पड़ा. हर्षा भोगले भारत के लगभग हर क्रिकेट प्रेमी फ़ैमिली के बीच अपनी पहचान मज़बूत बनाते चले गए.

खेल के इस पहलू को लपक लेने का श्रेय पूरा का पूरा हर्षा को ही जाता है क्योंकि बकौल उनके, "क्रिकेट सबसे लंबा चलने वाला सोप ओपेरा है जिसकी लोकप्रियता बढ़ती ही जाएगी.''

इन दिनों भोगले एक बार फिर अपनी कमेंट्री की वजह से सुर्ख़ियों में हैं क्योंकि उन्हें आईपीएल की कमेंट्री करने वाले पैनल से हटा दिया गया है. यह फ़ैसला जैसे डिबेट का मसला बन गया है.

हर्षा से सोमवार सुबह जब मेरी बात हुई तो उनकी आवाज़ में हैरानी के अलावा पहली बार लगे किसी सदमे जैसा अहसास मिला.

होना लाज़मी भी है. क्योंकि सचिन तेंदुलकर जैसा शख्स हर किसी के बारे में ऑन-रिकॉर्ड ये बात नहीं कहता, "मैंने महसूस किया है कि हर्षा से बात करने के बाद मेरी क्रिकेट की समझ में एक और पहलू दिखने लगता है.''

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