'प्रदूषण घटाने का इससे बड़ा फ़ॉर्मूला अभी नहीं'

गोपाल राय

दिल्ली में ऑड-ईवन योजना का दूसरा चरण शुक्रवार से शुरू हो गया है.

इस बारे में दिल्ली के परिवहन मंत्री गोपाल राय का कहना है कि इस बार सबसे बड़ा फ़र्क यह है कि पिछली बार फ़ैसला सरकार ने लिया था और इस बार जनता की मांग पर यह फ़ैसला किया गया है.

पढ़ें बीबीसी से उनकी पूरी बातचीत -

जिन वर्गों को छूट दी गई है वह पिछली बार की तरह ही है. इस बार जो बात नई है वह यह है कि सारे स्कूल खुले हैं, जबकि पिछली बार सारे विद्यालय बंद थे. यह एक नई चुनौती है इस ऑड-ईवन के लिए.

हालांकि शुक्रवार को रामनवमी की छुट्टी होने से बड़ी चुनौती नहीं है. हालांकि शनिवार और रविवार को भी छुट्टी है, तो असल चुनौती सोमवार को सामने आएगी.

इमेज कॉपीरइट EPA

इसके लिए दिल्ली वालों को तैयार होना है क्योंकि सबके सहयोग से इस चुनौती का सामना पिछली बार भी हमने किया था.

पिछली बार की तरह ही इस बार का सोमवार भी चुनौतीपूर्ण होगा.

कुछ माता-पिता को दोपहर में बच्चों को स्कूल से लेने जाना पड़ता है. मैं महिलाओं से अपील करना चाहता हूँ कि उन्हें छूट दी गई है.

आप जब स्कूल में बच्चों को लेने जाती हैं, तो वहां के प्रशासन से पता करें कि कोई ऐसा बच्चा तो नहीं है कि जिसके माता-पिता नहीं आ पा रहे हैं, तो उस बच्चे को वह ज़रूर उसके घर छोड़ें, जिसमें आपको मिली छूट का सकारात्मक उपयोग हो सकता है.

इसका मुख्य उद्देश्य प्रदूषण में कमी लाना था पर प्रदूषण में तो बहुत कमी हुई नहीं है. मगर ऑड-ईवन से ट्रैफ़िक में कमी हो सकती है.

मैंने पूरी दुनिया के प्रदूषण को कम करने के मिथक का अध्ययन किया. मगर ऑड-ईवन से बड़ी चीज़ अभी ईजाद नहीं हुई है. इससे अच्छी अगर कोई पॉलिसी है तो एक्सपर्ट उसे लेकर आएं.

मगर तमाम देशों में यह पॉलिसी बनी भी थी पर उसके बाद ड्रॉप भी हो गई क्योंकि बहुत ज़्यादा सफल नहीं हुई.

बल्कि हुआ यह कि एक नंबर मेरे पास ईवन है, दूसरी मैंने ऑड भी ख़रीद ली. नतीजा यह कि पहले ही गाड़ियों से भरी दिल्ली में गाड़ियों की तादाद और बढ़ गई.

मेरा मानना है कि लोग नहीं चाहेंगे तो कोई पॉलिसी सफल नहीं हो सकती. दिल्ली के लोगों ने गंभीरता के साथ इस चुनौती को लिया है और सफल किया है.

ऑड-ईवन से मज़बूत कोई मिथक नहीं है. पिछली बार भी 15-20 फ़ीसद प्रदूषण का स्तर नीचे गया था और कंजेशन लेवल नीचे हुआ था. कंजेशन प्रदूषण का सबसे अहम कारण है.

(बीबीसी संवाददाता मोहनलाल शर्मा से बातचीत पर आधारित)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार