राहुल के 'दुलारे' को स्मृति ईरानी का सहारा

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भोपाल के कौशल शाक्य को ये लगा था कि राहुल गांधी के 'दुलारे' होने से उनकी जिंदगी संवर जाएगी.

ऐसा होता दिखा भी, लेकिन मध्य प्रदेश कांग्रेस ने कौशल शाक्य को मझधार में छोड़ दिया.

लेकिन कौशल शाक्य को अब केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी का सहारा मिल गया है.

तो क्या है ये पूरा मामला. दरअसल, मार्च, 2013 में राहुल गांधी भोपाल गए थे तो कौशल शाक्य नाम के अखबार बेचने वाले लड़के ने उनके पास जाकर उन्हें मुफ़्त में अख़बार दिया.

इसके बाद मध्यप्रदेश कांग्रेस ने एक तरह से कौशल शाक्य को गोद ले लिया और उनके पिता को 1000 रुपये महीने की आर्थिक मदद देनी शुरू की.

इसके चलते कौशल शाक्य का नामांकन एक स्कूल में कराया गया. लेकिन तीन साल बीतने के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस ने शाक्य को मझधार में छोड़ दिया.

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उनके पिता दुलचंद शाक्य ने कांग्रेस पार्टी के दफ़्तर के कई चक्कर काटे तो भी मदद नहीं मिली. पैसे नहीं मिलने पर स्कूल प्रशासन ने भी कौशल शाक्य का नाम काट दिया.

लेकिन इस मौके का राज्य बीजेपी ने पूरा फ़ायदा उठाया. केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने इस लड़के को केंद्रीय विद्यालय में दाखिले का पत्र दिलवा दिया.

अब कौशल केंद्रीय विद्यालय क्रमांक एक में पढ़ाई करेगा और वह इसी सत्र से एक बार फिर से स्कूल जाने लगेगा.

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