हिमालय को 'पाइप में बंद' करने की योजना

इमेज कॉपीरइट Getty

महाराष्ट्र समेत भारत के कई इलाक़े लगातार सूखे की चपेट में हैं. इस बीच पानी के संकट को दूर करने के लए कई तरह की योजनाओं पर विचार किया जा रहा है.

महाराष्ट्र सरकार के उद्योग, खनन और पर्यावरण मंत्रालय तथा जलसंपदा विभाग की कुछ चिट्ठियों से ऐसा लगता है कि हिमालय के ग्लेसियर से पाइपलाइन के ज़रिये पूरे देश में सिंचाई और बाक़ी काम के लिए पानी पहुंचाने की योजना बनाई जा रही है.

इस योजना में केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी की ख़ास रुचि दिखती है.

महाराष्ट्र के उद्योग, खनन और पर्यावरण राज्य मंत्री प्रवीण पाटिल, केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी और जलसंपदा विभाग के उपसचिव ने अलग–अलग पत्र लिखकर नागपुर के विश्वेश्वरैया नेशनल स्कूल ऑफ़ टेक्नोलॉजी (वीएनआईटी) के निदेशक से इस दिशा में ज़रूरी शोध करने को कहा है.

ये तीनों ही पत्र 9 फरवरी से 16 फरवरी 2016 के बीच लिखे गए हैं.

आख़िर हिमालय से पानी लाने की यह योजना क्या है?

वीएनआईटी से एम टेक करते हुए, विदर्भ के सीनियर इंजीनियर प्रशांत जनबंधु ने हिमालय से पूरे देश में पानी पहुंचाने की योजना बनाई और इसपर एक शोध पेश किया.

योजना के मुताबिक़ हिमालय पर 9575 ग्लेशियर हैं, जिनका क्षेत्रफल 26413 किलोमीटर है.

इनसे 1292 घन किलोमीटर पानी उपलब्ध हो सकता है. इसके लिए हिमालय के इलाक़े में 12.5 लाख करोड़ की लागत से 55 डैम बनाने और उन से होकर देश के बड़े भाग तक पानी के पाइपलाइन के जाल का प्रस्ताव तैयार किया गया है.

इमेज कॉपीरइट Rohit Joshi

इस प्रस्ताव का दावा है कि इससे 132.83 मिलियन हेक्टेयर अतिरिक्त कृषि योग्य भूमि की सिंचाई हो सकती है, और 50 हज़ार मेगावाट बिजली पैदा की जा सकती है.

वीएनआईटी के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के असिस्टैंट प्रोफ़ेसर अविनाश वासुदेव कहते हैं कि यह योजना नदियों को जोड़ने की योजना से सस्ती है.

उनकी योजना है कि बिना बिजली के इस्तेमाल के हिमालय से बेकार बह जाने वाले पानी को पाइपलाइन के सहारे लाया जाए.

उनका कहना है, "इसपर विस्तृत शोध के लिए मंत्री प्रवीण पाटिल और नितिन गडकरी की सिफ़ारिशों के बाद हम 25 करोड़ रुपये का एक प्रस्ताव महाराष्ट्र सरकार को दे रहे हैं".

हिमलाय के ग्लेशियर के जानकार और वाडिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ हिमालयन जियोलाजी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. डी पी डोभाल ऐसी किसी योजना को शुरुआती विचार मानते हैं.

इमेज कॉपीरइट NLP

उनके अनुसार विकास ज़रूरी है और ऐसी योजनाओं से पानी का समाधान खोजने में हर्ज भी नहीं, लेकिन देखना यह होगा कि क्या ग्लेशियर से पर्याप्त पानी संभव है?

हिमालय में पहाड़ों के गांवों में ही सर्दियों में पानी की कमी होती है. डा. डोभाल के अनुसार इस योजना पर कई चरणों में बात करने की ज़रूरत होगी.

हालांकि जनबंधु कहते, "हिमालय में पहले से भी डैम हैं और ये हाइड्रो डैम ज्यादा ऊँचाई पर हैं. नए डैम हिमालय के पानी का भी समाधान करेंगे".

हालांकि ‘वाटरमैन’ के नाम से ख्यात मैग्सेसे सम्मान से सम्मानित राजेन्द्र सिंह को इस प्रस्ताव पर संदेह है.

उनके अनुसार नदियों को पाइप में बंद करना ठीक नहीं है.

इमेज कॉपीरइट AFP Getty Images

उनके मुताबिक़ "प्रकृति से ज्यादा छेड़-छाड़ पर्यावरण के लिए नुक़सानदायक है, नदियों को स्वाभाविक तरीक़े से बहने देना चाहिए."

दूसरी तरफ हिमालय के पर्यावरण से सम्बंधित इस प्रस्ताव की अनुशंसा करने के सवाल पर गडकरी का कोई जवाब तो नहीं मिला.

लेकिन उनके क़रीबी और एनजीओ ‘पूर्ती सिंचन’, जिसके स्थापना गडकरी ने ही की थी, के सचिव माधव कोटस्थाने के अनुसार विदर्भ और देश भर की सिंचाई की समस्या के हल के लिए गडकरी गंभीर रहे हैं.

उनके मुताबिक़ गडकरी भी नदियों को जोड़ने की योजना के हिमायती हैं और इस प्रस्ताव पर हिमालय का पर्यावरण उनकी पहली चिंता है.

कोटस्थाने कहते हैं, "शोध के बाद यह प्रस्ताव केंद्र सरकार के ‘इंटिग्रेटेड वाटर शेड्स मैनेजमेंट प्रोग्राम’ के पास आएगा, जिसका मैं और वाटरमैन राजेन्द्र सिंह, दोनों ही सदस्य हैं. तब हम इसके पर्यावरण वाले पक्ष को जरूर देखेंगे."

हालांकि अविनाश वासुदेव भी स्पष्ट करते हैं कि गडकरी ने हिदायत दी है कि शोध हिमालय के पर्यावरण के अनुकूल हो.

इमेज कॉपीरइट AFP

बीबीसी हिन्दी के सवालों का जवाब देते हुए महाराष्ट्र सरकार के जलसंपदा विभाग के उपसचिव प्रमोद मन्दारे ने साफ़ किया कि हम शोधपूर्ण प्रस्ताव तैयार करने के लिए वीएनआईटी को कह रहे हैं ताकि केंद्र सरकार को यह प्रस्ताव भेजा जा सके.

जनबंधु और वासुदेव इस योजना को किसानों की आत्महत्या का स्थाई समाधान भी बताते हैं.

उनके अनुसार सिंचाई के नहीं हो पाने से फ़सल नष्ट होना किसानों की सबसे बड़ी समस्या है, जिसका समाधान वे दे रहे हैं.

जनबंधु कहते हैं, "एक आंकड़े के अनुसार 1995 से 2013 तक 2 लाख ८४ हजार से ज़्यादा किसानों ने आत्महत्या की थी."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप य हां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार