कन्हैया और अन्य छात्र भूख हड़ताल पर

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जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया समेत कई छात्र बुधवार से अनिश्चितकाल के लिए भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं.

जेएनयू में फ़रवरी में हुई घटना के बाद विश्वविद्यालय ने एक कमेटी बनाई थी, जिसकी सिफ़ारिश पर छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार पर 10 हज़ार रुपये का ज़ुर्माना लगाया गया.

इसके अलावा कुछ और छात्रों पर ज़ुर्माना, कुछ को निलंबित और कुछ को हॉस्टल से निकालने का फ़ैसला किया गया. दो पूर्व छात्रों के जेएनयू कैम्पस में प्रवेश करने पर रोक लगा दी गई है.

इसी फ़ैसले के ख़िलाफ़ जेएनयू के छात्र अनिश्चितकाल के लिए भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं. जेएनयू छात्रसंघ के महासचिव रामा नागा ने बीबीसी को बताया कि जब तक जांच कमेटी की सिफ़ारिशों को वापस नहीं लिया जाएगा, जेएनयू में छात्रों की भूख हड़ताल जारी रहेगी.

रामा नागा ने बीबीसी संवाददाता मोहनलाल शर्मा से बातचीत में आरोप लगाया, "जांच कमेटी ही गलत नहीं है, बल्कि उसकी रिपोर्ट भी गलत है. कमेटी ने 24 घंटे के अंदर ही कई छात्रों के ख़िलाफ़ फ़ैसला सुना दिया और कहा कि ये लोग कसूरवार हैं, जबकि अंतिम रिपोर्ट में उन छात्रों का नाम भी नहीं था."

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उन्होंने आरोप लगाया कि जेएनयू में कमेटी के प्रमुख राकेश भट्टाचार्या का आरक्षण के ख़िलाफ़ इतिहास रहा है और जिन छात्रों के ख़िलाफ़ फैसला लिया गया है, उनमें कई छात्र एससी, एसटी और अल्पसंख्यक समुदाय से आते हैं.

रामा नागा ने बताया कि उन लोगों की शुरू से ही मांग थी कि ऐसे व्यक्ति को कमेटी का प्रमुख न बनाया जाए.

रामा नागा ने कहा कि जेएनयू की आंतरिक प्रक्रिया की परंपरा ये रही है कि तमाम तरह की कमेटियों में छात्रसंघ को भी जगह दी जाती है.

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