अगस्ता पर राजस्थान में भी सियासत गरमाई

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अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर मामले को लेकर राजस्थान में भी सियासत गरमा गई है.

राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट ने अगस्ता हेलीकॉप्टर ख़रीद मामले से खज़ाने को हुए घाटे की उच्च स्तरीय जाँच की मांग की है.

सचिन पायलट ने कहा कि ना खाऊंगा और ना खाने दूंगा का दावा करने वाले प्रधानमंत्री मोदी ने भ्रष्टाचार के मामले में अपनी पार्टी के मुख्यमंत्रियों व नेताओं को मौन स्वीकृति दे रखी है.

उधर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि चूँकि कांग्रेस इसपर चारों तरफ से घिर गई है इसलिए ध्यान बंटाने के लिए ऐसा कर रही है.

सचिन पायलट ने एक बयान में कहा है कि अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर ख़रीद मामले में प्रदेश के राजस्व को एक करोड़ 14 लाख रुपये का चूना लगा था.

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कांग्रेस ने अपनी प्रेस विज्ञपित में कहा है कि कैग ने भी सवाल उठाया था कि उसकी रिपोर्ट पर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पर कोई कार्यवाही क्यों नहीं की गई.

उधर परनामी ने कहा कि हेलीकॉप्टर ख़रीद में पूर्ण पारदर्शिता बरती गई. उन्होंने माना कि प्रशिक्षित पायलट उपलब्ध नहीं होने के कारण हेलीकॉप्टर ख़रीदने के बाद कुछ समय तक इसका उपयोग नहीं हुआ.

इस दौरान मुख्यमंत्री की यात्राओं पर 1.14 करोड़ रुपये ख़र्च हुए. इस पर राज्य की जनलेखा समिति पहले ही रिपोर्ट पेश कर चुकी है इसलिए अब और जांच का कोई औचित्य नहीं है.

उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस संतुष्ट नहीं थी तो पिछले पांच साल सूबे में उनकी सरकार थी उन्होंने मामले की जांच क्यों नहीं करवाई.

राज्य में यह विवादित हेलीकॉप्टर 2011 में कांग्रेस मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कार्यकाल में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था और उसके बाद उपयोग में नहीं लिया जा रहा है.

हेलीकॉप्टर का सौदा बीजेपी की वसुंधरा राजे के 2003 से 2008 के कार्यकाल में हुआ था.

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