बुंदेलखंड में सूखा, यूपी ने ठुकराई पानी की ट्रेन

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Image caption इससे पहले केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र के लातूर में ट्रेन से पानी भेजा था

चिलचिलाती गर्मी और बुंदेलखंड में पानी की किल्लत के बावजूद उत्तर प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार की ओर से पानी की ट्रेन की पेशकश को फ़िलहाल स्वीकार करने से मना कर दिया है.

राज्य सरकार का कहना है कि इसके लिए 'न तो मांग की गई थी और न ही अभी ज़रूरत है.'

पढ़ें- बीबीसी की ख़ास पेशकश - सूखा भारत

उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव सूचना नवनीत सहगल ने बीबीसी को बताया कि राज्य सरकार को बिना किसी सूचना के पानी की एक ट्रेन भेजने की बात की जा रही है.

उन्होंने कहा, "अब उस पानी को रखने की समस्या है और उसके बाद एक और ट्रेन भेजने की बात हो रही है. राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को सूचित किया है कि अभी पानी की इतनी ज़रूरत नहीं है कि उसे ट्रेन से भेजा जाए, जब ज़रूरत होगी तब इसे मँगा लिया जाएगा."

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उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड इलाक़े में पानी की क़िल्लत के चलते केंद्र सरकार ने लातूर की तरह यहां भी ट्रेन से पानी भेजने का इंतज़ाम किया था.

पानी से लदे दस टैंकरों वाली इस ट्रेन को कोटा से रवाना किया गया, लेकिन जब ये झांसी ही पहुँची थी तब राज्य सरकार ने इसे लेने से इंकार कर दिया.

इस ट्रेन को छह तारीख़ को महोबा आना था लेकिन अब इसके आने की संभावना कम ही है.

उधर महोबा के ज़िलाधिकारी ने बीबीसी को बताया कि इस इलाके में पानी की ज़रूरत है लेकिन इतनी भी नहीं है कि बाहर से पानी मँगाया जाए.

ज़िलाधिकारी वीरेश्वर सिंह के मुताबिक़ गांवों और शहरों में पानी की जरूरत पूरी करने के लिए पास के ट्यूबवेलों से टैंकरों के माध्यम से पानी पहुंचाया जा रहा है.

वीरेश्वर सिंह का कहना है कि दो सौ तीन सौ मीटर की दूरी पर ट्यूबवेल से पानी पहुंचाना ज़्यादा आसान है जबकि बीस तीस किलोमीटर दूर रेलवे स्टेशन से पानी पहुंचाना अपने आप में एक बड़ी समस्या है.

दरअसल बुंदेलखंड इलाक़े के कुछ भाजपा सांसदों ने लातूर की तरह बुंदेलखंड में भी ट्रेन से पानी पहुंचाने की मांग की थी, जिसे रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने मंज़ूर कर लिया था.

लेकिन अब राज्य सरकार ने इसे ग़ैरज़रूरी बताकर इसके औचित्य पर सवाल खड़ा कर दिया है.

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