नन्ही मशीन जांच सकती है स्तन कैंसर

  • 6 मई 2016
इमेज कॉपीरइट Chirantana Bhatt

मिहिर शाह मेडिकल डिवाइस टैक्नोलॉजी डेवलपमेंट के क्षेत्र में काम कर रहे थे.

उन्होंने सोचा नहीं था कि वो स्तन कैंसर को लेकर कोई काम करेंगे.

फ़िर हालात कुछ़ ऐसे बदले कि मिहिर के काम की राह भी बदल गई.

इमेज कॉपीरइट UE Life Sicences

उनकी सास को स्तन कैंसर का पता चला और जब घर में इस पर बात होने लगी, तब पता चला कि कुछ और क़रीबी महिलांए भी इसका शिकार हैं.

लेकिन ज़्यादातर यही होता आया है कि स्तन कैंसर के बारे में, कोई खुल कर बात करना पसंद नहीं करता.

मिहिर ने घर में सामने आई इस समस्या को जानने कि कोशिश की और उन्हें पता चला कि स्तन कैंसर, महिलाओं में सबसे सामान्य रूप से होने वाला कैंसर है.

इमेज कॉपीरइट UE Life Sicences

स्तन कैंसर कि जांच जितनी जल्द हो जाए, उतना बहेतर है क्योंकि देर होने पर महिला के लिए जान का ख़तरा भी बढ़ जाता है.

विकासशील देशों में, ख़ास कर ग्रामीण महिलाओं में स्तन कैंसर की जांच की कोई सुविधा नहीं होती है.

मेमोग्राफ़ी से इसकी जांच की जा सकती है लेकिन, इसके लिए एक एक्सपर्ट का होना ज़रुरी है, जबकि भारत में रेडियोलोजिस्ट्स की संख्या केवल दस हज़ार है.

इन सब हक़ीकतों को देखते हुए, मिहिर ने ऐसी मशीन बनाने के बारे में सोचा जो छोटी हो, यह तुरंत रिज़ल्ट बता सके और इसमें रेडिएशन का ख़तरा न हो.

इमेज कॉपीरइट UE Life Sicences

इस मशीन से जांच के दौरान दर्द से बचा जा सके और एक आम हेल्थ वर्कर भी आसानी से उसका उपयोग कर सके.

2009 में मिहिर ने सह-संस्थापक मैथ्यू केंम्पिसी के साथ मिल कर फ़िलाडेल्फिया में यूई लाइफ़ साइंसेज़ इंक शुरु किया.

40 लाख़ अमरिकी डॉलर के निवेश और वित्तीय मदद से यूई लाइफ़ साइंसेज़ का काम शुरु हुआ.

इमेज कॉपीरइट UE Life Sicences

मिहिर के पास मेडिकल टेक्नॉलोजी को ‘कंसेप्ट से क्लिनिक तक’ ले जाने का अनुभव था, तो इलेक्ट्रिकल इंजीनियर मेथ्यू को चिकित्सा उपकरण बनाने का अनुभव था.

फिर यूई लाइफ़ साइंसेज़ ने स्तन कैंसर का पता लगाने के लिए एक छोटी सी मशीन बनाई.

इस छोटे से डिवाइस से स्तन में किसी भी प्रकार के छोट से गांठ का भी पता लगाया जा सकता है और उसकी पूरी जानकारी मशीन से जुड़े डिजीटल नोट पैड पर कुछ ही मिनटों में मिल जाती है.

इमेज कॉपीरइट UE Life Sicences

मिहिर ने बताया, “कोई भी मेडिकल डिवाइस लोगों तक पहुंचाना मुश्किल होता है. आप उसकी सफ़लता की जांच करें, उसके पहले लोगों को उसके इस्तेमाल के लिए तैयार करना पडता है. हम स्वैच्छिक संस्था, कॉरपोरेट, हेल्थ केयर सर्विसेज़, पब्लिक हेल्थ सेंटर्स जैसे अलग-अलग डिलेवरी एजेंट के ज़रिये हर स्तर पर महिलाओं तक पहुंचना चाहते हैं".

उनका कहना है, "पोर्टेबल मशीन से की जाने वाली जांच का ख़र्च भी कम है और उससे दर्द भी नहीं होता. साल 2016 के अंत तक हम भारत में 10 लाख महिलाओं तक यह सेवा पहुंचाना चाहते हैं.”

इमेज कॉपीरइट UE Life Sicences

मुंबई के जाने माने कैंसर विशेषज्ञ बोमन ढाभर कहते हैं, “ऐसे कई मामले आते हैं, जिनमें स्तन कैंसर एडवांस स्टेज पर पहुंच चुका होता है. भारत में आज भी स्तन कैंसर की जांच, पहले सैल्फ एक्ज़ामिनेशन से होती है, बाद में एक्सपर्ट जांच करते है और मेमोग्राफ़ी अंत में होती है. संकोच की वजह से महिलाएं डॉक्टर के पास जांच नहीं कराती हैं".

उनका कहना है, "इस आसान डिवाइस से नर्स या हॉस्पिटल का जुनियर स्टाफ़ भी प्राथमिक जांच कर सकते हैं और गांठ दिखने पर मेमोग्राफ़ी का सुझाव दे सकते हैं. इस डिवाइस की वजह से प्राथमिक जांच के लिए कैंसर विशेषज्ञ के पास जाना ज़रुरी नहीं होता. हमने स्तन कैंसर की जांच के कैंम्प में इस डिवाइस कुछ मरीज़ों में गांठ का पता लगाया था, जिन्हें बाद में मेमोग्राफ़ी के लिए कहा गया.”

इमेज कॉपीरइट Chirantana Bhatt

आने वाले समय में यूई लाइफ़ साइंसेज़ दूसरे प्रकार के कैंसर की जांच के लिए मशीन बनाना चाहता है, जिससे कि विकासशील देशों में वंचितो तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच सके और जागरूकता बढ़ाई जा सके.

भारत के बाद यूई लाइफ़ साइंसेज़ की इच्छा दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य-पूर्व और लैटिन अमरीका में काम करने की है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार