वाम की नौका पार लगाने वाले 92 साल के मार्क्सवादी

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पिछले चुनाव के दौरान जब राहुल गांधी ने वीएस अच्युतानंदन की उम्र पर टिप्पणी की थी तो उन्होंने जवाब में एक मलयालम कविता सुनाई थी.

कविता की पंक्तियाँ थीं, "सफ़ेद बाल मेरी बढ़ती उम्र नहीं दिखाते, न ही किसी का कमउम्र होना उसकी जवानी का संकेत. बुर्जुआ के सामने तन कर खड़े रहना ही मेरी जवानी है."

उस वक्त 87 साल के रहे अच्युतानंदन बहुत ही कम अंतर से चुनाव हार गए थे.

वो अब 92 साल के हैं और सीपीएम का नेतृत्व करते हुए वो लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) को जीत की ओर ले गए हैं.

पांच साल के अंतराल के बाद भी न तो उनके उत्साह में कोई कमी दिखती है और न ही नेतृत्व करने की क्षमता में, जैसे कम अंतर से हुई पिछली हार बस कल की ही बात हो.

'द हिंदू' अख़बार के एसोसियट एडिटर सी गौरीदासन नायर ने बीबीसी हिंदी से कहा, ''एक स्तर पर लगता है कि वे सत्ता पाना चाहते हैं लेकिन वे बहुत गंभीरता के साथ आधुनिक राजनीति की बात कर रहे हैं. वे जनता से जुड़े मुद्दों की बात करते रहे हैं. इसके कारण उनका पार्टी के नेतृत्व के साथ मनमुटाव हो जाता है और यह उन्हें जनता के और नज़दीक ले जाता है."

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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अच्युतानंदन एक जटिल व्यक्तित्व वाले नेता हैं जिन्होंने कोई भी अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की.

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक बीआरपी भास्कर का कहना है, ''उनमें आया बदलाव उल्लेखनीय है. केरल में कोई भी उन जैसा नहीं है. यहां तक कि उनके प्रतिद्वंदी कांग्रेसी ओमान चांडी ने भी उन्हीं की तरह का करना शुरू किया है. अच्युतानंदन ने उन मुद्दों को उठाया जिनसे आदिवासी और समाज के पिछड़े तबके के लोग प्रभावित होते हैं. ऐसा कोई आंदोलन नहीं था जिसके साथ वो ना जुड़े हों.''

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि उनके सलाहकारों की टीम की वजह से उनमें बदलाव आया.

लेकिन उनके सलाहकार रहे जोसेफ सी मैथ्यू जोर देते हुए कहते हैं, "उनकी टीम के कारण उनके अंदर यह बदलाव नहीं आया. यह उनका ख़ुद का फ़ैसला था और उन्होंने इस बात की परवाह नहीं की कि सामने कौन है. उन्होंने जिन मुद्दों को उठाया, उससे यह साफ झलकता है."

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Image caption कांग्रेस पार्टी के नेता ओमान चांडी ने भी अच्युतानंदन का अनुकरण किया है.

कई बार उनके सामने विरोध में पार्टी नेतृत्व खड़ा रहता था.

बीआरपी भास्कर ने बताया, "मुख्यमंत्री के तौर पर वे मुन्नार हिल स्टेशन में होने वाले अवैध निर्माण के ख़िलाफ़ थे, लेकिन पार्टी को यह पसंद नहीं आया. लेकिन उन्होंने निर्माण रुकवा दिया."

सी गौरीदासन नायर ने बताया, "उन्होंने अपनी बात पहुंचाने के लिए टेलीविज़न का बखूबी उपयोग किया. वो जंगल माफियाओं के ख़िलाफ़ लड़ रहे थे, पर्यावरण और महिलाओं से जुड़े मुद्दों को उठा रहे थे. वो सैद्धांतिक रूप से सही राजनीति करने की बात कर रहे थे. लेकिन यह एक समय लेफ्ट को कुछ लोगों को मंजूर नहीं था. उनका अभियान लोगों के लिए था."

राजनीतिक विश्लेषक जो स्कैरिया का कहना है, "जब वो पिछली बार सत्ता में थे तो उनका प्रशासन ज़रूर बदनाम था लेकिन लोग उन्हें एक साफ-सुथरा और अच्छे नेता के रूप में पसंद करते थे. लोग उन पर ओमान चांडी से ज्यादा विश्वास करते थे. उनके बेटे के ख़िलाफ़ कई आरोप भी थे लेकिन किसी ने भी उनकी व्यक्तिगत ईमानदारी पर कभी शक नहीं किया. वो केरल में एक अलग ही शख्सियत जान पड़ते हैं क्योंकि कांग्रेस और लेफ्ट, दोनों ही दलों के नेता आरोपों का सामना कर रहे हैं."

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पार्टी के अंदर उनके प्रतिद्वंदी पिनारयी विजयन ने उन्हें खारिज करने की बहुत कोशिश की. यहां तक कि वो चाहते थे कि उन्हें विधानसभा का टिकट भी नहीं मिले लेकिन उनकी लोकप्रियता के सामने पार्टी को अपना इरादा बदलना पड़ा.

पार्टी के साथ उलझन यह है कि अच्युतानंदन वैसी राजनीतिक भाषा में बात करते हैं जो जनता को समझ में आती है.

बीआरपी भास्कर बताते हैं, ''सीपीएम में ईएमएस नंबूदरीपाद के बाद कोई ऐसा नहीं है जो कि महान नेता बन पाया. लेकिन सभी निवार्चन क्षेत्रों में आपको अच्युतानंदन के पोस्टर जरूर मिल जाएंगे. यहां तक कि पिनारयी विजयन के विधानसभा क्षेत्र में भी."

केरल में आम आदमी के लिए उनकी मौजूदगी एक अलग ही अहमियत रखती है.

स्कैरीया का कहना है, ''लेफ्ट के लिए वो एक भीड़ जुटाने वाले नेता है."

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सी गौरीदासन नायर कहते हैं, "इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि अच्युतानंदन आम आदमी के कम्युनिस्ट नेता हैं."

जो स्कैरिया एक सवाल का जिक्र करते हैं जो एक दशक पहले उनसे एक पत्रकार ने पूछा था.

पत्रकार ने उनसे पूछा था कि पार्टी के अंदर प्रतिद्वंदिता होने के कारण आप कब तक मुख्यमंत्री रह पाएंगे? तब अच्युतानंदन ने जवाब दिया था, "आप इंतज़ार कीजिए और देखते जाइए कि मैं कब तक मुख्यमंत्री रहता हूं."

बीआरपी भास्कर कहते हैं, ''उन्हें पार्टी के अंदर अपनी स्थिति को लेकर कभी कोई उलझन नहीं रही, लेकिन वो कभी भी पार्टी से अलग नहीं गए."

अच्युतानंदन हर रोज शाम और सुबह एक घंटे तक व्यायाम करते हैं.

जोसेफ सी मैथ्यू ने बताया, ''दो साल पहले तक वो शीर्षासन करके हम लोगों को अचंभे में डाल देते थे. वो बहुत अनुशासित हैं और उनका राजनीतिक नजरिया बिल्कुल साफ है."

इसलिए इस उम्र में भी वो इतनी गर्मी में दिन में चार-पांच सभाओं को संबोधित कर पाते हैं और रात में देर तक काम करते हैं.

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