12 साल से रामा आगे-आगे, पुलिस पीछे-पीछे

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बिहार के सांसद रामा किशोर सिंह को सुप्रीम कोर्ट ने अपहरण मामले में 7 जून से पहले दुर्ग की ज़िला अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया है.

छत्तीसगढ़ पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद राहत की सांस ली है.

रामा किशोर सिंह बिहार की वैशाली लोकसभा सीट से लोक जनशक्ति पार्टी के सांसद हैं और छत्तीसगढ़ पुलिस के दस्तावेज़ों में ‘मोस्ट वांटेट’ भी हैं.

पुलिस पिछले 12 सालों से रामा किशोर सिंह को गिरफ़्तार करने की कोशिश करती रही है, लेकिन वे इससे बचते रहे हैं.

सबसे पहले रामा किशोर सिंह ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से इस मामले में राहत मांगी थी. लेकिन छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 2012 में ही उनकी अर्ज़ी ख़ारिज कर दी थी.

इसके बाद रामा किशोर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई, जहां से उन्हें छत्तीसगढ़ की स्थानीय अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया गया है.

छत्तीसगढ़ पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "हम यह मान कर चल रहे हैं कि बिहार से ऑपरेट होने वाले इस तरह के मामलों में कुछ और राज़ सामने आ सकते हैं."

दरअसल मौजूदा मामला 2001 का है. छत्तीसगढ़ के दुर्ग ज़िले के कुम्हारी इलाक़े में 29 मार्च 2001 को पेट्रोल पंप व्यवसायी जयचंद बैद का अपहरण हुआ था. अपहरणकर्ता जयचंद बैद को उनकी कार के साथ ले गए थे.

डेढ़ महीने बाद बड़ी मुश्किल से जयचंद वैद की रिहाई संभव हो पाई थी.

पुलिस का आरोप है कि जयचंद बैद अपहरण में जिस कार का इस्तेमाल किया गया था, वह कार रामा किशोर सिंह के घर से ही बरामद हुई थी.

जयचंद वैद के अपहरण के समय रामा किशोर सिंह बिहार के महनार इलाक़े के विधायक थे.

तब इस मामले में पुलिस ने 10 लोगों को गिरफ़्तार किया था.

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एक आरोपी उपेंद्र सिंह ऊर्फ़ कबरा को 6 फ़रवरी 2013 जब पुलिस एक पेशी के बाद जनशताब्दी एक्सप्रेस से दुर्ग से रायपुर ले कर जा रही थी, उस समय उपेंद्र और उसके साथियों ने ट्रेन को 'हाईजेक' कर लिया था और उपेंद्र फ़रार हो गया था. बाद में मार्च 2013 में उपेंद्र को झारखंड के धनबाद से गिरफ़्तार किया गया.

छत्तीसगढ़ पुलिस ने जयचंद बैद अपहरण मामले में उपेंद्र सिंह ऊर्फ़ कबरा और लोजपा सांसद रामा किशोर सिंह समेत 13 लोगों को इस मामले में अभियुक्त बनाया था, जिसमें से 10 लोगों को विभिन्न धाराओं के तहत आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई जा चुकी है.

सुप्रीम कोर्ट के ताज़ा आदेश के बाद अब रामा किशोर सिंह को मुक़दमे का सामना करना होगा. संकट ये है कि रामा किशोर सिंह इस मामले में सज़ा से बच भी जायें और बाइज़्ज़त बरी हो जायें तो भी यह मामला उनका पीछा नहीं छोड़ेगा.

पिछले चुनाव में रामा किशोर सिंह ने राजद के वरिष्ठ नेता डॉक्टर रघुवंश प्रसाद सिंह को वैशाली लोकसभा सीट से हराया था और रघुवंश प्रसाद सिंह ने जयचंद वैद अपहरण कांड को ही आधार बना कर पटना हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की है.

राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉक्टर रघुवंश प्रसाद सिंह का आरोप है कि चुनाव आयोग को दिये गये शपथ पत्र में रामा किशोर सिंह ने वैद अपहरण कांड से संबंधित जानकारी नहीं दी है, इसलिये लोकसभा की उनकी सदस्यता रद्द की जानी चाहिए.

हमने पूरे मामले में कई बार रामा किशोर सिंह से फ़ोन और संदेश भेज कर उनका पक्ष जानने की कोशिश की लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई.

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